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रांची: झारखंड में भ्रूण लिंग जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर और डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

Ranchi: झारखंड सरकार ने अवैध भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है. पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम को...

Ranchi: झारखंड सरकार ने अवैध भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है. पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम को कड़ाई से लागू करने के लिए आज दो उच्च राज्यस्तरीय बैठकें हुईं. बैठकों में साफ कर दिया गया कि नियम तोड़ने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों और एक से अधिक जगहों पर सेवा दे रहे डॉक्टरों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई होगी. साथ ही, अवैध क्लीनिकों के खिलाफ जल्द ही विशेष जांच अभियान भी चलाया जाएगा. बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया कि कोई भी डॉक्टर अधिकतम दो अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ही सेवा दे सकेगा. स्वास्थ्य विभाग ऐसे डॉक्टरों की सूची तैयार कर रहा है, जो दो से अधिक केंद्रों पर काम कर रहे हैं. ऐसे मामलों में जांच के बाद सीधे कार्रवाई की जाएगी.

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झारखंड में कुल 1161 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालित

पहली बैठक पीसी एंड पीएनडीटी राज्य सलाहकार समिति एवं राज्य समुचित प्राधिकारी की थी, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने की. दूसरी बैठक राज्य निरीक्षण एवं अनुश्रवण समिति की थी, जिसकी अध्यक्षता निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने की. दोनों बैठकों में नवनियुक्त सदस्यों को कानून के प्रावधान, तकनीकी पहलुओं और उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई. साथ ही, स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली आगामी राज्य पर्यवेक्षण बोर्ड की बैठक के एजेंडे पर भी चर्चा हुई. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मार्च 2026 तक झारखंड में कुल 1161 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालित हैं. पीसी एंड पीएनडीटी कानून को लागू करने के लिए अब तक जिला सलाहकार समिति की 108 बैठकें हो चुकी हैं, जबकि 718 अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों का निरीक्षण किया जा चुका है. कार्रवाई के तहत 30 क्लीनिकों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, एक केंद्र को सील और जब्त किया गया है, जबकि एक मामले में अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है.

अवैध लिंग जांच के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति

अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने अवैध लिंग जांच के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही. उन्होंने अधिकारियों को विशेष टीम बनाकर औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया. उन्होंने यह भी कहा कि जांच टीम को आखिरी समय तक यह नहीं बताया जाएगा कि किस क्लीनिक में छापेमारी करनी है, ताकि पूरी कार्रवाई गोपनीय तरीके से हो और किसी को पहले से भनक न लगे. बैठक में पीसीपीएनडीटी के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. प्रदीप कुमार सिंह और आईईसी के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. राहुल किशोर सिंह ने भी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने सुझाव दिए. सरकार ने मुखबिर/डिकॉय योजना को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया है. इस योजना के तहत अवैध लिंग जांच कराने या करवाने वालों की सूचना देने पर कुल 1 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाएगा. इसमें सही सूचना देने वाले मुखबिर को 40 हजार रुपये, डिकॉय ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला को 40 हजार रुपये और उसके सहयोगी को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे.

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आमलोगों से सहयोग करने की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि अगर कहीं भी अवैध लिंग जांच की जानकारी मिले, तो 104 हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें. विभाग ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. बैठक में राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के प्रतिनिधि, चिकित्सा विशेषज्ञ, पीसीपीएनडीटी की राज्य समन्वयक रफत फरजाना, विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधि और राज्य व जिला स्तर के अधिकारी मौजूद थे.

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