Chakradharpur: झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा है कि झारखंड आंदोलनकारियों को न्याय के साथ सम्मान और स्वाभिमान से जीने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के लिए दशकों तक संघर्ष करने वाले आंदोलनकारी आज आर्थिक तंगी और उपेक्षा का जीवन जीने को मजबूर हैं. चक्रधरपुर और चाईबासा दौरे के दौरान उर्दू लाइब्रेरी के समीप सेंट्रल मोहर्रम कमेटी के सदस्यों को मोहर्रम की शुभकामनाएं देने एवं आंदोलनकारियों से मुलाकात के क्रम में उन्होंने यह बातें कहीं. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों और जारी संकल्पों का पालन नहीं होना आंदोलनकारियों के लिए बेहद दुखद है. वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है, जबकि कई आंदोलनकारी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया छोड़ चुके हैं.
आंदोलनकारियों को अब तक नहीं मिला पूरा सम्मान
पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड राज्य के गठन से पहले आंदोलनकारियों ने 30 से 35 वर्ष तक अलग राज्य के लिए संघर्ष किया और राज्य बनने के बाद भी पिछले 25 वर्षों से सम्मान, पहचान, पेंशन और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें राजकीय सम्मान, अलग पहचान, रोजगार की गारंटी और सम्मानजनक पेंशन नहीं मिल पाई है.

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शिबू सोरेन को सर्वोच्च राजकीय सम्मान देने की मांग
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान दिया जाना गौरव की बात है, जिसके लिए वे केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हैं. हालांकि, राज्य सरकार द्वारा शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलनकारियों के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से सम्मानित नहीं किया जाना चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन के संघर्ष का ही परिणाम झारखंड राज्य का गठन है. महतो ने कहा कि आज आंदोलनकारी अपने ही राज्य में पहचान के मोहताज बन गए हैं और उनके परिवारों के अधिकारों की भी अनदेखी हो रही है. उन्होंने सरकार से आंदोलनकारियों के मान-सम्मान, पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की.
मौके पर वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी मानसिंह बंकिरा, अमीर हसन, हसनैन अंसारी, मो. बारीक, बुधराम उरांव, राघवेंद्र प्रसाद, विजय सिन्हा, गगन प्रधान, लाल दास, सोनाराम लोवादा, वसीउर रहमान, राजू भाई, इफ्तेखार अहमद, मोहम्मद नेहाल, मोहम्मद फिरोज, मोहम्मद शेरु, जफर नसीम, ईशु खान सहित कई लोग उपस्थित थे.


