Ranchi: अदालत ने ओरमांझी पुलिस द्वारा जब्त किए गए 1500 पीस कच्चे नमक लगे चमड़े को मुक्त करने का आदेश दिया है. उक्त आदेश न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा (नंबर-1) की अदालत ने दिया. न्यायायुक्त की अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें उक्त सामग्री को छोड़ने से इनकार कर दिया गया था.
सड़ने वाली वस्तु पर टिप्पणी
अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि जब्त किया गया चमड़ा एक सड़ने वाली वस्तु है, जिसे लंबे समय तक पुलिस कस्टडी में रखने से इसके खराब होने और संक्रमण फैलने का खतरा है. मामले में लोअर बाजार थाना क्षेत्र के मस्जिद गली, गुदड़ी निवासी तौफीक रजा कुरैशी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए न्यायायुक्त की अदालत में याचिका दाखिल की थी.

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क्या है मामला
तौफीक रजा कुरैशी के खिलाफ ओरमांझी थाना में कांड संख्या 89/26 (झारखंड गोवंशीय पशु वध प्रतिषेध अधिनियम, 2005 के तहत) मामला दर्ज किया गया था, जिसमें पुलिस ने उनके टाटा 1109 वाहन (रजिस्ट्रेशन नंबर- WB33D 6448) और उसमें लदे 1500 पीस कच्चे चमड़े को जब्त कर लिया था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
तौफीक रजा कुरैशी की ओर से अधिवक्ता राहुल पांडेय ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ही इस जब्त सामग्री का वास्तविक मालिक है, जिसने इसे मेसर्स अज़हरी इंटरप्राइजेज से वैध जीएसटी बिल और इनवॉइस के साथ खरीदा था. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य) का हवाला देते हुए निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया.


