Hazaribagh : झारखंड के जंगलों की अनमोल देन और स्थानीय खानपान की पहचान बन चुका फुटका (रुगड़ा) इन दिनों बाजारों में छाया हुआ है. मानसून की पहली बारिश के साथ निकलने वाले इस दुर्लभ जंगली मशरूम की लोकप्रियता अब राज्य की सीमाओं को पार कर विदेशों तक पहुंच चुकी है. इसका ताजा उदाहरण हजारीबाग के मूल निवासी रवि कुमार हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत हैं और वर्ष 2026 के पहले सीजन का फुटका खाने के लिए विशेष रूप से अपने गृह नगर हजारीबाग पहुंचे.
झारखंडी स्वाद का जादू: फुटका खाने विदेश से लौटे रवि कुमार
रवि कुमार ने बताया कि उन्हें फुटका का स्वाद लिए करीब साढ़े तीन साल हो गए थे. जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि नए सीजन का फुटका बाजार में उपलब्ध हो गया है, उन्होंने परिवार के साथ हजारीबाग आने की योजना बना ली. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में हर तरह के आधुनिक और स्वादिष्ट व्यंजन उपलब्ध हैं, लेकिन झारखंड के फुटका का स्वाद कहीं नहीं मिलता. उनके अनुसार यह केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि बचपन की यादों, परिवार और अपनी मिट्टी से जुड़ाव का एहसास है. फुटका, जिसे झारखंड के कई इलाकों में रुगड़ा भी कहा जाता है, एक विशेष प्रकार का जंगली मशरूम है. इसकी बनावट और स्वाद के कारण इसे कई लोग वेज मटन के नाम से भी जानते हैं. यह केवल मानसून के शुरुआती दिनों में सीमित समय के लिए उपलब्ध होता है, जिसके कारण इसकी मांग काफी अधिक रहती है. इस समय हजारीबाग के बाजारों में फुटका की कीमत लगभग 1400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, बावजूद इसके खरीदारों की भीड़ लगातार बनी हुई है.

झारखंड की शान फुटका, स्वाद के दीवाने खींचे चले आ रहे घर
रवि कुमार की पत्नी ने भी फुटका की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि झारखंड आने के बाद सबसे पहले फुटका खाने की इच्छा होती है. इसकी सब्जी का स्वाद बेहद खास और लाजवाब होता है. उन्होंने कहा कि विदेशों में कई तरह के मशरूम मिलते हैं, लेकिन हजारीबाग के फुटका जैसा स्वाद कहीं नहीं मिलता. मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि हजारीबाग आकर फुटका न खाया जाए, तो यात्रा अधूरी लगती है. मानसून के दौरान कुछ ही सप्ताह के लिए उपलब्ध होने वाला फुटका झारखंड की खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. हर साल इसकी मांग बढ़ती जा रही है और लोग दूर-दूर से इसे खरीदने पहुंचते हैं. आज फुटका केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि झारखंड की परंपरा, जंगलों की समृद्धि और स्थानीय स्वाद की पहचान बन चुका है. इसकी बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि अपनी मिट्टी का स्वाद लोगों को दुनिया के किसी भी कोने में रहने के बावजूद अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।


