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हजारीबाग: विभावि के मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में बौद्धिक विमर्श: ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन

Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय प्रबंधन विभाग में गुरुवार को ज्ञान और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिला. विभाग...

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Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय प्रबंधन विभाग में गुरुवार को ज्ञान और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिला. विभाग के एमबीए सेमिनार हॉल में “वर्तमान परिदृश्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली का महत्व और प्रासंगिकता” विषय पर एक बेहद गरिमामय और उच्च स्तरीय विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया. इस विशेष संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य आधुनिक कॉर्पोरेट और प्रबंधन की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को भारत की समृद्ध वैचारिक एवं वैज्ञानिक विरासत से रूबरू कराना था. कार्यक्रम में प्रबंधन जगत से जुड़े विशेषज्ञों के साथ-साथ भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.

 मुख्य वक्ता का स्वागत, निदेशक ने समकालीन महत्व पर दिया जोर

बौद्धिक सत्र की विधिवत शुरुआत डॉ. संजीव कुमार शर्मा द्वारा मुख्य वक्ता और दूर-दराज से आए अतिथियों व प्रतिभागियों के गर्मजोशी से स्वागत के साथ हुई, जहां उन्होंने मुख्य वक्ता को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया. इसके बाद विभाग के निदेशक डॉ. मो. मुख्तार आलम ने अपने स्वागत संबोधन से पूरे सभागार में ऊर्जा भर दी. उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की सदियों पुरानी गौरवशाली विरासत पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समकालीन युग में भी यह ज्ञान उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था. निदेशक ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारत की मूल ज्ञान प्रणाली के विभिन्न आयामों को समझें और इसे अपने जीवन व करियर में आत्मसात करें.

अतीत की धरोहर ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान: प्रो. संजय कुमार शर्मा

ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रख्यात प्रोफेसर संजय कुमार शर्मा ने मुख्य वक्ता के तौर पर अपने व्याख्यान से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ भारत द्वारा विज्ञान, गणित, चिकित्सा शास्त्र, दर्शनशास्त्र और नैतिक मूल्यों के क्षेत्र में दिए गए वैश्विक योगदान को विस्तार से रेखांकित किया. उन्होंने अकादमिक तर्कों के साथ यह साबित किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की यादों को संजोने के लिए नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य में आने वाली वैश्विक चुनौतियों व संकटों के समाधान का सबसे मजबूत आधार है. व्याख्यान के बाद हुए प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने खुलकर सवाल पूछे, जिनका प्रो. शर्मा ने बेहद तार्किक ढंग से जवाब दिया.

डॉ. अहमद अजहर ने जताया आभार, बड़ी संख्या में जुटे बीबीए और एमबीए के छात्र

ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सत्र के समापन पर डॉ. अहमद अज़हर ने मंच से धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. उन्होंने मुख्य वक्ता के अमूल्य समय के लिए आभार जताया और कार्यक्रम को सफल बनाने में निदेशक, सम्मानित शिक्षकों, विश्वविद्यालय के कर्मठ कर्मचारियों तथा अनुशासित विद्यार्थियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की. पूरे कार्यक्रम का कुशल और सफल मंच संचालन डॉ. संजीव कुमार शर्मा द्वारा किया गया. इस ऐतिहासिक व्याख्यान के दौरान प्रबंधन विभाग के तमाम वरिष्ठ प्राध्यापक, शिक्षाविद और मुख्य रूप से एमबीए व बीबीए के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस अकादमिक चर्चा के गवाह बने.

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