Gumla: कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला, विकास भारती बिशुनपुर द्वारा निकरा ग्राम शिवराजपुर, घाघरा में आम फसल पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आम में फल मक्खी (Fruit Fly) के वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन तथा बेहतर विपणन संबंधी तकनीकों से अवगत कराना था. कार्यक्रम में कुल 53 किसानों ने भाग लेकर आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी प्राप्त की.
फल मक्खी नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय बताए गए
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अटल बिहारी तिवारी ने आम में फल मक्खी के एकीकृत प्रबंधन (Integrated Pest Management-IPM) पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फल मक्खी आम की सबसे प्रमुख कीटों में से एक है, जिसकी मादा विकसित हो रहे फलों में अंडे देती है. अंडों से निकलने वाले लार्वा फल के गूदे को खाते हैं, जिससे फल समय से पहले गिर जाते हैं तथा उनकी गुणवत्ता एवं बाजार मूल्य दोनों प्रभावित होते हैं. उन्होंने किसानों को बताया कि फेरोमोन ट्रैप फल मक्खी प्रबंधन की एक प्रभावी, पर्यावरण-अनुकूल तथा रसायन-मुक्त तकनीक है. इसमें नर फल मक्खियों को आकर्षित कर उन्हें फंसाया जाता है, जिससे उनका प्रजनन चक्र बाधित होता है और कीटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आती है. उन्होंने सलाह दी कि बाग में प्रति हेक्टेयर निर्धारित संख्या में फेरोमोन ट्रैप लगाकर समय-समय पर ल्यूअर (Lure) को बदलना चाहिए. साथ ही गिरे हुए संक्रमित फलों को एकत्र कर नष्ट करना तथा बाग की नियमित साफ-सफाई बनाए रखना भी आवश्यक है.

कार्यक्रम में इंजीनियर एनो राई ने किसानों को आम की वैज्ञानिक तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उचित परिपक्वता पर फलों की तुड़ाई, सावधानीपूर्वक पैकिंग तथा वैज्ञानिक ढंग से परिवहन करने से फलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होता है.
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फेरोमोन ट्रैप से कम हुआ फल मक्खी का प्रकोप
प्रगतिशील किसान राजेश उरांव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले 10 से 15 प्रतिशत फलों में फल मक्खी के कारण नुकसान होता था, लेकिन इस वर्ष कृषि विज्ञान केंद्र की पहल पर पूरे गांव के आम बगीचों में फेरोमोन ट्रैप लगाने के बाद फल मक्खी का प्रकोप काफी कम हुआ है. इसके परिणामस्वरूप फलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ, क्षति घटी, फसल लागत में कमी आई तथा बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है.
कार्यक्रम के अंत में किसानों को आम उत्पादन में समेकित कीट प्रबंधन, वैज्ञानिक बाग प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण विपणन तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि फेरोमोन ट्रैप जैसी जैव-अनुकूल तकनीकों का व्यापक उपयोग न केवल रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन को भी बढ़ावा देगा. ऐसी तकनीकों के प्रसार से किसानों की लागत में कमी, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार तथा आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है.


