Jamtara: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) जामताड़ा की ओर से शनिवार को स्थायी लोक अदालत परिसर में सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य विभागों और न्यायालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित करना था.
लोक अदालत के इतिहास पर प्रकाश
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष राधा कृष्ण, डीएलएसए सचिव पवन कुमार, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष रिजवान अहमद, एलएडीसी (LADC) के मुख्य अधिवक्ता उत्तम तिवारी तथा अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राधा कृष्ण ने अपने संबोधन में लोक अदालत के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में लोक अदालत की आधुनिक अवधारणा का श्रेय पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती को जाता है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1982 में गुजरात में पहली लोक अदालत आयोजित हुई थी, जबकि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत इसे वैधानिक मान्यता मिली. उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआती दौर में पोस्टकार्ड के माध्यम से भी लोक अदालत में मामलों की सुनवाई कर लोगों को न्याय उपलब्ध कराया जाता था.

मामलों का शीघ्र निष्पादन
डीएलएसए (Dlsa) सचिव पवन कुमार ने विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि उनके विभागों से जुड़े मामलों में न्यायालय को समय पर जवाब उपलब्ध कराया जाए, ताकि मामलों का शीघ्र निष्पादन हो सके. उन्होंने विशेष रूप से सड़क दुर्घटना, बीमा और ऋण संबंधी मामलों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया. स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष रिजवान अहमद ने कहा कि स्थायी लोक अदालत की स्थापना से आम लोगों को सुलभ और त्वरित न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है. उन्होंने कहा कि उनके समक्ष आने वाले मामलों का शीघ्र निष्पादन करने का हर संभव प्रयास किया जाता है. एलएडीसी के मुख्य अधिवक्ता उत्तम तिवारी ने कहा कि स्थायी लोक अदालत गरीब एवं निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए न्याय प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है, जहां बिना किसी संकोच के अपने विवाद प्रस्तुत किए जा सकते हैं.
दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते का प्रयास
समापन संबोधन में डीएलएसए सचिव पवन कुमार ने कहा कि स्थायी लोक अदालत सबसे पहले दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते का प्रयास करती है. यदि समझौता नहीं हो पाता है तो वह मामले के गुण-दोष के आधार पर स्वयं निर्णय देने का अधिकार रखती है. उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत का निर्णय अंतिम एवं सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है तथा इसके विरुद्ध किसी नियमित न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती. कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों, बार काउंसिल के अधिवक्ताओं एवं अन्य संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया.
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