Hazaribagh: सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जल नल योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड अंतर्गत परतगा गांव में यह योजना ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन तो लगा दी गई है, लेकिन योजना शुरू होने के करीब दो वर्ष बाद भी आज तक नलों से एक बूंद पानी नहीं निकला है.
दैनिक जरूरतों के लिए नदी और चापाकलों पर निर्भरता
जलापूर्ति शुरू नहीं होने के कारण आज भी ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए नदी और चापाकलों पर निर्भर रहना पड़ता है. गर्मी के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती है, जब पानी के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई जल नल योजना का लाभ ग्रामीणों को अब तक नहीं मिल पाया है. गांव में बनी पानी की टंकी और बिछाई गई पाइपलाइन सिर्फ सरकारी दावों की याद दिलाती है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.

प्रशासन उदासीन, ग्रामीण चंदा जुटाकर करा रहे चापाकलों की मरम्मत
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में मौजूद कई चापाकल समय-समय पर खराब हो जाते हैं. ऐसे में उनकी मरम्मत के लिए भी प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की जाती. मजबूर होकर गांव के लोग आपस में चंदा जुटाकर चापाकलों की मरम्मत कराते हैं, ताकि पेयजल की व्यवस्था बनी रहे. एक तरफ सरकारी स्तर पर हर घर जल का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
जिला प्रशासन से जांच और जलापूर्ति शुरू करने की मांग
परतगा गांव के वासियों में इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है, कि इस पूरी योजना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. साथ ही, तकनीकी कमियों को दूर कर जल्द से जल्द सुचारू रूप से जलापूर्ति शुरू कराई जाए, ताकि गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए दर-दर भटकना न पड़े.
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