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बोकारो: रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए मजदूर की सड़क हादसे में मौत, शव को वतन लाने की सरकार से गुहार

Bermo: रोजगार की तलाश में सात समंदर पार गए प्रवासी मजदूरों की मौत का अंतहीन सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा...

Bokaro bermo
पीड़ित परिवार

Bermo: रोजगार की तलाश में सात समंदर पार गए प्रवासी मजदूरों की मौत का अंतहीन सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. बेरमो अनुमंडल के गोमिया प्रखंड अंतर्गत सुदूर ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के कतवारी गांव में उस वक्त मातम पसर गया, जब ग्रामीणों को पता चला कि स्व. सुखदेव महतो के 41 वर्षीय पुत्र सत्येंद्र महतो की सऊदी अरब में एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई है. 25 जून की रात हुई इस असमय और दर्दनाक दुर्घटना की खबर जैसे ही कतवारी गांव पहुंची, परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. घर में कोहराम मच गया और सत्येंद्र की पत्नी व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है.

ट्रक ड्राइवर काम करता था सत्येंद्र

बता दें, सत्येंद्र महतो अपने बूढ़े कंधों और परिवार की उम्मीदों को संजोकर 26 नवंबर 2024 को झारखंड की इस माटी से दूर सऊदी अरब के लिए रवाना हुआ था. घर की माली हालत को सुधारने और बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने लिए उसने वहां ‘हमद सालेह अल-काफ कॉन्ट्रैक्टिंग एस्टैब्लिशमेंट’ नामक कंपनी में बतौर ट्रक ड्राइवर काम संभाल लिया था. लेकिन किसे पता था कि रात-दिन स्टीयरिंग थामकर परिवार की गाड़ी खींचने वाले सत्येंद्र की जिंदगी की रफ्तार को सऊदी अरब की सड़कें इस तरह असमय थाम देंगी. सत्येंद्र की हुई अचानक मौत से पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है. वह अपने पीछे 21 वर्षीय पुत्री प्रीति कुमारी, पुत्र अरविंद कुमार और सबसे छोटे 13 वर्षीय पुत्र मंगेश कुमार को छोड़ गया है. पिता का साया उठ जाने से अब इन मासूमों की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश पर गहरा संकट मंडराने लगा है.​

समाजसेवी सिकंदर अली ने पीड़ित परिवार की मुलाकात

गौरतलब हो, कि झारखंड के बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह जैसे जिलों से हर साल हजारों की तादाद में मजदूर रोजगार के अभाव में पलायन करने को मजबूर हैं. स्थानीय स्तर पर नियोजन और रोजगार की मुकम्मल व्यवस्था न होने की यह एक ऐसी कड़वी हकीकत है, जो हर दिन किसी न किसी परिवार का चिराग बुझा रही है. वहीं, इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही प्रवासी मजदूरों के हक में आवाज उठाने वाले प्रखर समाजसेवी सिकंदर अली पीड़ित परिवार के घर पहुंचे. उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और गहरी संवेदना प्रकट की.​

पार्थिव शरीर को घर वापस लाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास करने की मांग

इस दौरान उन्होंने राज्य की नियोजन नीति और बदहाल जमीनी हकीकत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, कि रोजी-रोटी की तलाश में परदेस गए झारखंडी प्रवासी मजदूरों की मौत का यह खौफनाक सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. हर दूसरे दिन राज्य के किसी न किसी कोने से किसी मजदूर की मौत या विदेश में बंधक बनने की दर्दनाक खबरें सामने आती हैं. उन्होंने सरकार से मांग की है, कि अगर समय रहते झारखंड के ग्रामीण इलाकों में ही युवाओं को रोजगार की गारंटी दी जाए, तो इस तरह के जानलेवा पलायन को रोका जा सकता है. फिलहाल, रोते-बिलखते पीड़ित परिवार ने झारखंड सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है, कि सत्येंद्र के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द वतन वापस लाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाएं, ताकि परिजन आखिरी बार उसका चेहरा देख सकें और अपने पैतृक गांव में सम्मानजनक तरीके से उसका अंतिम संस्कार किया जा सके.

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