Ranchi: केंद्र सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी शिवपुर-कठौतिया न्यू बीजी इलेक्ट्रिक रेल लाइन परियोजना पर नए सरकारी नियमों का ग्रहण लग गया है. कोयला परिवहन को गति देने के उद्देश्य से बनाई जा रही इस बेहद महत्वपूर्ण रेल लाइन का निर्माण कार्य पिछले डेढ़ महीने से पूरी तरह बाधित है. एक तरफ जहां केंद्र सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के नए नियमों ने काम को अधर में लटका दिया है जिससे समय पर प्रोजेक्ट पूरा होने को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है.
क्या है पूरा विवाद?
परियोजना स्थल पर जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) द्वारा मिट्टी का उठाव रोक दिया गया है. विवाद की मुख्य जड़ झारखंड सरकार का एक नया आदेश है, जिसके तहत अब राज्य में किसी भी निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले लघु खनिजों की आपूर्ति के लिए ई-परिवहन चालान को अनिवार्य कर दिया गया है. सरकार के आदेशानुसार अब पत्थर, बालू, मिट्टी, मोरम और ईंट जैसे लघु खनिजों की आपूर्ति केवल झारखंड एकीकृत खान एवं खनिज प्रबंधन प्रणाली पोर्टल से जारी वैध ई-परिवहन चालान के जरिए ही हो सकेगी. बिना ई-चालान के इन खनिजों का परिवहन या उपयोग पूरी तरह अवैध माना जाएगा.

नीतिगत विरोधाभास,बिना लीज व्यवस्था के चालान कैसे?
सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से अवैध खनन पर रोक लगेगी और खनिज आपूर्ति में पारदर्शिता आएगी, लेकिन इस नियम ने निर्माण एजेंसियों और संवेदकों (ठेकेदारों) के सामने एक अजीबोगरीब कानूनी संकट खड़ा कर दिया है. झारखंड में मिट्टी के खनन के लिए कोई व्यवस्थित लीज (पट्टा) प्रणाली या वैध आपूर्ति तंत्र उपलब्ध ही नहीं है. जब राज्य में मिट्टी का कोई वैध स्रोत या लीज व्यवस्था अधिसूचित ही नहीं है, तो JIMMS पोर्टल से इसके लिए वैध ई-परिवहन चालान आखिर कैसे जारी किया जा सकता है?
रायल्टी के साथ भारी जुर्माने की मार
- – इस नीतिगत विसंगति का सीधा नुकसान निर्माण एजेंसियों को उठाना पड़ रहा है
- – वर्तमान सरकारी व्यवस्था के तहत मिट्टी पर 20 रुपये प्रति घनमीटर की दर से रायल्टी निर्धारित है.
- – वैध वाउचर या ई-चालान प्रस्तुत न करने पर रायल्टी के साथ दंडात्मक राशि।भी वसूली जाती है
- – कई मामलों में यह दंडात्मक भुगतान निर्धारित रायल्टी से दोगुना या उससे भी अधिक हो जाता है.
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