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झारखंड पुलिस : CID की पहल पर अब सभी 24 जिलों में ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ से होगी लापता बच्चों की तलाश

Dheeraj Singh Ranchi : झारखंड में लापता बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए झारखंड पुलिस ने एक बेहद सराहनीय और आधुनिक...

मिशन वात्सल्य पोर्टल'

Dheeraj Singh

Ranchi : झारखंड में लापता बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए झारखंड पुलिस ने एक बेहद सराहनीय और आधुनिक कदम उठाया है. CID की विशेष पहल पर अब राज्य के सभी 24 जिलों में ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ के जरिए लापता बच्चों की तलाश तेज कर दी गई है. इस डिजिटल मुहिम के तहत राज्य के सभी थानों को देशव्यापी नेटवर्क से जोड़ दिया गया है. जिससे अब झारखंड पुलिस भी हाईटेक और डिजिटल तरीके से बच्चों को ट्रैक कर सकेगी. कुछ महीने पहले तक यह सेवा राज्य के सभी जिलों में सुचारू रूप से लागू नहीं हो पाई थी, लेकिन CID मुख्यालय के कड़े निर्देश के बाद अब इसे पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से शुरू कर दिया गया है.

जिला कप्तानों को CID का सख्त निर्देश

लापता बच्चों की बरामदगी को लेकर CID बेहद गंभीर है. इस मामले में 19 जून 2026 को रांची, जमशेदपुर और धनबाद के एसएसपी समेत राज्य के सभी जिलों के एसपी को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है. इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ पर गुमशुदा बच्चों का एक विस्तृत डेटाबेस उपलब्ध है. इस पोर्टल में बच्चों को ट्रैक करने की अत्याधुनिक सुविधाएं हैं. मंत्रालय ने 6 जून और 9 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के जरिए बैठक की थी. जिसमें लापता और बरामद लोगों की पूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करने और उनका मिलान करने के निर्देश दिए गए थे.

थानों को भी है मिला टास्क

अब सभी थानों के सीसीटीएनएस CCTNS ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्य में मिलने वाले किसी भी अज्ञात या बरामद बच्चे के हुलिए का मिलान पोर्टल पर मौजूद लापता बच्चों के डेटा से किया जाए. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी संबंधित रेंज के डीआईजी और जोनल आईजी करेंगे.

केंद्रीय मंत्रालय के तीन प्रमुख दिशा-निर्देश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोर्टल के प्रभावी उपयोग के लिए तीन मुख्य बिंदुओं पर काम करने का निर्देश दिया है.

  • मैपिंग ऑफ यूजर्स एंड यूनिट : इसके तहत सभी पुलिस स्टेशनों के पुराने ‘ट्रैक चाइल्ड पोर्टल’ को नए ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ के साथ सही तरीके से मैप (जोड़ा) जाएगा, ताकि सिस्टम का सही इस्तेमाल हो सके.
  • डेटा एंट्री एंड अपडेशन : लापता बच्चों से जुड़े सभी नए और पुराने मामलों की पूरी जानकारी बिना किसी देरी के लगातार मिशन वात्सल्य पोर्टल पर अपलोड करनी होगी.
  •  मैचिंग ऑफ केस : बरामद हुए लोगों और लापता लोगों के हुलिए का मिलान करने के लिए पोर्टल पर उपलब्ध फीचर्स का अधिकतम उपयोग किया जाएगा और इसकी लगातार मॉनिटरिंग होगी.

मिशन वात्सल्य पोर्टल की चार प्रमुख विशेषताएं

  • यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लापता बच्चों को खोजने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है. इसकी चार मुख्य खूबियां इस प्रकार हैं.
  • एकल डिजिटल मंच : पूरे देश के लिए एक ही सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म.
  • बेहतर निगरानी : डेटा ट्रैकिंग और बच्चों की मॉनिटरिंग अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और सटीक होगी.
  • एकीकरण : खोया-पाया और ट्रैक चाइल्ड को एक साथ मर्ज कर दिया गया है.
  • पारदर्शिता :  इस सिस्टम से संसाधनों का सही इस्तेमाल होगा और काम में पूरी पारदर्शिता आएगी.

झारखंड में पिछले 6 वर्षों का आंकड़ा, लगातार बढ़ रहे हैं मामले

राज्य में पिछले छह सालों (1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2025) के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के लापता होने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. जिसके कारण इस पोर्टल की आवश्यकता और बढ़ गई थी.

वर्षवार आंकड़े इस प्रकार हैं

  •  साल 2020 में 365 बच्चे लापता हुए. जिनमें 340 बच्चे को बरामद किया गया. बाकी 41 बच्चे का पता नहीं चल पाया है.
  • साल 2021 में 414 बच्चे लापता हुए. जिनमें 387 बच्चे बरामद हुए, इनमें से 59 बच्चे का पता नहीं चल पाया.
  • साल 2022 में 475 बच्चे लापता हुए. इनमें से 450 बच्चे बरामद हुए, बाकी के 64 बच्चे का पता नहीं चल पाया है.
  • साल 2023 में 512 बच्चे लापता हुए. इनमें से 481 बच्चे बरामद हुए, बाकी के 72 बच्चे का पता नहीं चल पाया.
  • साल 2024 में 542 बच्चे लापता हुए. इनमें से 505 बच्चे बरामद हुए, बाकी के 80 बच्चे का पता नहीं चल पाया.
  • साल 2025 में 717 बच्चे लापता हुए. इनमें से 625 बच्चे बरामद हुए, बाकी के 148 बच्चे का कोई पता नहीं चल पाया.

 

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