Ranchi : भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने पिछले दिनों लागू किए गए ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (खुदरा बिक्री केंद्रों के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026 को वापस लेने का निर्णय लिया है. यह नया आदेश एक जुलाई से प्रभावी हो जाएगा. सरकार के इस कदम से तेल कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब बाजार में पेट्रोल और डीजल की बिक्री व वितरण पहले की तरह सामान्य रूप से संचालित हो सकेगा.
क्या था पुराना आदेश
केंद्र सरकार ने 12 जून को एक आदेश जारी किया था. इसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खुदरा बिक्री केंद्रों (पेट्रोल पंपों) के माध्यम से पेट्रोल (एमएस) और डीजल (एचएसडी) की बिक्री और वितरण को नियंत्रित करने के लिए कुछ अस्थाई उपाय लागू किए गए थे. इन अस्थाई उपायों का मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना, जनता को उचित कीमतों पर पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराना और इसका न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना था.

क्यों लिया गया वापस लेने का फैसला
सरकार के नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोलियम उत्पादों की वर्तमान आपूर्ति की स्थिति की व्यापक समीक्षा की है. समीक्षा के बाद सरकार इस बात से पूरी तरह संतुष्ट है कि अब जनहित में इन अस्थाई निर्देशों और प्रतिबंधों को जारी रखना आवश्यक नहीं है. देश में ईंधन की आपूर्ति की स्थिति अब सामान्य और स्थिर है.
एक जुलाई से पूरी तरह बदल जाएगी व्यवस्था
मंत्रालय के निदेशक अरुण कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश के अनुसार, सरकार अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 12 जून के अपने पुराने आदेश को एक जुलाई से आधिकारिक रूप से वापस ले रही है.
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