रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन जल जीवन मिशन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस टेंगरी गांव को गोद लेने की बात कही थी, वहां अब तक पानी सहित समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है. उन्होंने पलामू और गढ़वा में जल जीवन मिशन की योजनाओं की जांच कराने की मांग की. इस पर मंत्री योगेंद्र प्रताप ने कहा कि मुख्यमंत्री ने टेंगरी गांव को गोद नहीं लिया था बल्कि वहां समुचित व्यवस्था कराने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि योजना का काम कर रहा संवेदक बीच में ही काम छोड़कर भाग गया था, इसलिए अब दोबारा टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. मेसर्स सनराइज और मेसर्स इलिजा इंजीनियरिंग को काली सूची में डालने की प्रक्रिया चल रही है और लापरवाह संवेदकों को डिबार किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रांश नहीं मिलने के कारण कुछ योजनाएं अधूरी हैं.

मंत्री के जवाब पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई. विधायक सीपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद इतने समय में व्यवस्था नहीं हो पाई और मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं. वहीं मथुरा महतो ने कहा कि उन्होंने पूरे झारखंड का दौरा कर एक रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन वह रिपोर्ट कहां गई यह स्पष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि राजधानी रांची में ही पिछले दस दिनों से पानी की समस्या बनी हुई है. सत्ता आती जाती रहती है, इसलिए मंत्री को कुछ अच्छा काम करके जाना चाहिए.

