Seraikela : जिले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. चांडिल वन क्षेत्र के शीशी गांव में बीती रात हाथी ने अंगद सिंह मुंडा के घर की दीवार तोड़ दी और घर में रखे अनाज-चावल को खा गया. दहशत के कारण पूरा परिवार रातभर जागकर सुबह होने का इंतजार करता रहा. घटना बीती देर रात की है. ग्रामीणों के अनुसार रात में अचानक दीवार गिरने की आवाज सुनकर सोया हुआ परिवार डर गया. हाथी घर की दीवार तोड़कर अंदर घुसा और अनाज को अपना निवाला बना लिया. परिवार के लोग डर के मारे कमरे में दुबके रहे और सुबह होने का इंतजार करते रहे.
हाथी ने तोड़ा दीवार
ग्रामीण रात करीब 1 बजे जोर से आवाज आई. देखा तो हाथी दीवार तोड़कर चावल खा रहा था. हम सब डर से कांप रहे थे. बच्चे रोने लगे. सुबह तक बाहर नहीं निकल पाए. अब घर में खाने को भी नहीं बचा. स्थानीय लोगों का कहना है कि ईचागढ़ के दर्जनों गांव हाथी-मानव संघर्ष से प्रभावित हैं. चांडिल वन विभाग की टीम रोज हाथी भगाने पर हजारों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हाथियों को प्रभावित क्षेत्रों से खदेड़ने में नाकाम साबित हो रही है.

आखिर कब तक ऐसे जिएंगे?
ग्रामीणों में वन विभाग के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति भारी नाराजगी है. उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद टीम समय पर नहीं पहुंचती और हाथी गांव में घुसकर नुकसान कर जाते हैं. रोज हाथी आ रहे हैं. वन विभाग सिर्फ कागज पर खर्च दिखाता है. जमीन पर कुछ नहीं है. न टॉर्च, न पटाखा, न टीम हम रात-रात भर जागते हैं. दलमा सेंचुरी से पलायन कर हाथियों का झुंड ईचागढ़ क्षेत्र में डेरा डाले हुए है. जंगल में भोजन की कमी और लगातार हो रहे बालू खनन के कारण हाथी भोजन की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं. ईचागढ़ में मानव-हाथी संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है. अगर वन विभाग ने ठोस रणनीति नहीं बनाई और प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा नहीं दिया, तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ सकता है.


