Ranchi : धनबाद रिंग रोड घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब किसी मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC-ST Act) दोनों लागू हो, तो बाद में लागू हुआ विशेष कानून प्रभावी माना जाएगा. ऐसे मामलों की सुनवाई SC-ST Act की विशेष अदालत ही करेगी. यह मामला 18 आरोपियों की जमानत याचिकाओं से जुड़ा है. आरोपियों ने विशेष PC Act अदालत द्वारा जमानत खारिज किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मामले में एफआईआर FIR के तहत PC Act, 1988 और SC-ST Act, 1989 दोनों के प्रावधान लगाए गए थे. मुख्य प्रश्न यह था कि मामले की सुनवाई किस विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगी.
21 दिनों के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करें
हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में लागू हुआ विशेष कानून, यानी SC-ST Act, इस मामले में प्रभावी होगा. इसलिए PC Act की विशेष अदालत को न तो मामले में संज्ञान (कॉग्निजेंस) लेने का अधिकार था और न ही जमानत याचिकाओं पर फैसला देने का. अदालत ने PC Act की विशेष अदालत द्वारा पारित जमानत अस्वीकृति आदेश और संज्ञान लेने के आदेश, दोनों को “नॉन-एस्ट” (कानूनी रूप से अस्तित्वहीन एवं अमान्य) घोषित कर दिया. इसके साथ ही पूरे मामले को उसकी मूल स्थिति (Original Position) में बहाल करते हुए SC-ST Act की विशेष अदालत को भेजने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने संबंधित विशेष अदालत को निर्देश दिया है कि वह 21 दिनों के भीतर मामले की सुनवाई पूरी कर कानून के अनुरूप निर्णय ले. हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल किसी भी आरोपी को जमानत नहीं दी है. सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अब SC-ST Act की विशेष अदालत ही नए सिरे से विचार करेगी.

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