Click Here
Click Here
Click Here

हजारीबाग: SBMCH अस्पताल के 500 आउटसोर्सिंग कर्मियों को 5 महीने से नहीं मिला वेतन, DC को सौंपा ज्ञापन

Hazaribagh: शहर के प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के सब्र का...

हजारीबाग
डीसी को सौंपा ज्ञापन

Hazaribagh: शहर के प्रतिष्ठित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है. अस्पताल में कार्यरत लगभग 500 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को पिछले 4 से 5 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण इन कर्मियों और उनके परिवारों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी इस दर्दनाक स्थिति की लिखित जानकारी हजारीबाग के उपायुक्त को सौंपकर अविलंब हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। कर्मचारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने उनके वेतन का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित नहीं कराया, तो वे काम ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल और उग्र आंदोलन पर जाने के लिए पूरी तरह से बाध्य होंगे.

एएनएम, जीएनएम और वार्ड बॉय समेत कई विभाग ठप होने के आसार

अस्पताल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से बहाल किए गए इन 500 कर्मियों में एएनएम, जीएनएम, वार्ड बॉय, लैब असिस्टेंट, कंप्यूटर ऑपरेटर और ओटी असिस्टेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम करने वाले लोग शामिल हैं. इन कर्मचारियों का कहना है कि वे सभी बेहद अल्प वेतनभोगी हैं, जिन्हें मात्र 15 हजार से 20 हजार रुपये के बीच मासिक मानदेय मिलता है. इतने कम वेतन के बावजूद लगातार 4 महीने से पैसे न मिलने के कारण किसी के घर का राशन पूरी तरह समाप्त हो चुका है, तो किसी के बच्चों की स्कूल फीस न जमा होने के कारण उनका विद्यालय जाना बंद हो गया है. स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि बीमार कर्मचारी और उनके बूढ़े मां-बाप पैसों की तंगी की वजह से अपनी जरूरी दवाइयां तक नहीं खरीद पा रहे हैं.

सिविल सर्जन ऑफिस और ट्रेजरी के बीच झूल रही है वेतन की फाइल

सदर अस्पताल में पदस्थापित पीड़ित कर्मचारी सुभाष कुमार सिंह ने प्रशासनिक ढर्रे पर सवाल उठाते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि जब भी कर्मचारी अपनी फरियाद लेकर सिविल सर्जन के पास जाते हैं, तो वहां से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि फाइल आगे बढ़ा दी गई है और मामला ट्रेजरी में रुका हुआ है। इसके विपरीत, जब कर्मचारी ट्रेजरी कार्यालय के चक्कर काटते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि सीएस कार्यालय से भेजे गए बिलों में गंभीर त्रुटियां और प्रॉब्लम हैं। इस तरह सिविल सर्जन कार्यालय और ट्रेजरी विभाग की आपसी खींचतान और कागजी उलझनों के बीच 500 कर्मचारियों का भविष्य पिछले कई महीनों से अधर में झूल रहा है।

ALSO READ:  रांची: ध्वस्त हुए पुल-पुलिया मामले में 20 अभियंताओं पर आरोप गठित, एक संवेदक डिंबार घोषित

अस्पताल प्रबंधन के उदासीन रवैये के बाद अब सीधे आर-पार की लड़ाई का मन

कर्मचारियों ने बताया कि इस गंभीर मानवीय समस्या को लेकर उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि कई बार अस्पताल प्रबंधन के साथ वार्ता की और अपनी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिला और समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला. थक-हारकर अब कर्मचारियों ने हजारीबाग उपायुक्त से मांग की है कि वह इस प्रशासनिक गतिरोध को तत्काल दूर कर अल्प वेतनभोगी स्वास्थ्य कर्मियों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करवाएं. कर्मचारियों का कहना है कि समस्या पूरी तरह से सीएस ऑफिस और ट्रेजरी के बीच की है, जिसे अधिकारी आपस में बैठकर सुलझाएं और उनके खातों में पैसे डालें. यदि इस सप्ताह भी भुगतान नहीं होता है, तो पार्टी जिला कमेटी के समर्थन के साथ सभी स्वास्थ्य कर्मी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे, जिससे अस्पताल की पूरी व्यवस्था ठप हो सकती है.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *