Ranchi: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में लंबित पड़े अदालती मामलों के त्वरित निष्पादन को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. इस समस्या के समाधान के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया. प्रोजेक्ट भवन स्थित मुख्य सचिव कार्यालय में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के प्रशासनिक अमले और विधि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
उच्च स्तरीय बैठक में बड़े अधिकारी और नए महाधिवक्ता रहे मौजूद
बैठक की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों ने हिस्सा लिया. इसके अलावा, राज्य के नव नियुक्त महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय भी इस बैठक में विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनसे कानूनी पेचीदगियों और मामलों को गति देने पर महत्वपूर्ण विमर्श किया गया.

मुख्य सचिव ने जताई चिंता, समय पर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने विभिन्न विभागों में हजारों की संख्या में लंबित पड़े कोर्ट केसों पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने सभी विभागीय सचिवों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मामलों का निपटारा समय सीमा के भीतर होना चाहिए. चर्चा के दौरान मुख्य रूप से इन दो बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया. जिनमें पहला यह है कि सभी विभाग तय समय के भीतर कोर्ट में अपना शपथ पत्र दायर करें, ताकि जवाब दाखिल न होने की वजह से मामलों में अनावश्यक देरी न हो और दूसरा किसी भी अदालती फैसले के बाद विभाग को समय रहते यह तय कर लेना होगा कि उन्हें ऊपरी अदालत में अपील में जाना है या नहीं, ताकि प्रक्रिया में सुस्ती न आए.
आ रहा है ‘विधि पोर्टल 2.0’, मामलों की ट्रैकिंग होगी आसान
बैठक से निकलकर आई सबसे बड़ी खबर यह है कि सरकार कानूनी मामलों की मॉनिटरिंग को डिजिटल रूप से और मजबूत करने जा रही है. इसके तहत पूर्व से चल रहे ‘विधि पोर्टल’ को अपग्रेड करने का फैसला लिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के मामलों पर हुआ मंथन
बैठक में केवल निचली अदालतों ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट में लंबित राज्य सरकार से जुड़े मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई. मुख्य सचिव ने इस दौरान सभी विभागीय सचिवों से जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को समझा और उनके त्वरित समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव भी मांगे. महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने भी सरकार का पक्ष अदालतों में मजबूती से और बिना किसी देरी के रखने को लेकर कई अहम कानूनी सुझाव साझा किए.


