Ranchi: झारखंड में मानसून सक्रिय हो चुका है. बंगाल की खाड़ी में बने वेल मार्क्ड लो प्रेशर (कम दबाव का क्षेत्र) के असर से राज्य भर में अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश के आसार हैं. मौसम विभाग के अनुसार, यह मौसमी सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है, जिससे झारखंड के विभिन्न हिस्सों में नमी बनी रहेगी. यह स्थिति धान की रोपाई और खरीफ फसलों की बुवाई में जुटे किसानों के लिए एक बड़ी राहत है.
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अगले 5 दिनों का हाल: बारिश और वज्रपात की चेतावनी
राज्य में अगले पांच दिनों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे और अधिकांश स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा होने की प्रबल संभावना है. मौसम विभाग ने विशेष रूप से वज्रपात (ठनका) और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने को लेकर चेतावनी जारी की है. किसानों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे न रहें और खुले खेतों में काम करते समय सतर्कता बरतें.
भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जोन
• 05 जुलाई: दक्षिण-पश्चिमी झारखंड (पश्चिम सिंहभूम, गुमला, सिमडेगा और खूंटी).
• 06 जुलाई: पश्चिमी हिस्से (सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा और पलामू).
• 07 जुलाई: दक्षिण-पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भाग (लोहरदगा और रांची).
पिछले 24 घंटों का तापमान और बारिश का लेखा-जोखा
राज्य में बीते दिन मौसम का मिजाज मिला-जुला रहा. सबसे अधिक बारिश सिमडेगा के बोलबा में 51.6 मिमी दर्ज की गई. अगर तापमान की बात करें, तो राज्य के प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा. पाकुड़ में सबसे अधिक 35.1 डिग्री सेल्सियस और लातेहार में सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. डाल्टेनगंज में 35.0 डिग्री सेल्सियस, जमशेदपुर में 33.2 डिग्री सेल्सियस, बोकारो में 33.1 डिग्री सेल्सियस, सराइयकेला में 33.1 डिग्री सेल्सियस,चाईबासा में 32.4 डिग्री सेल्सियस और रांची में 30.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किय़ा गया.
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रांची का मौसम पूर्वानुमान
राजधानी रांची में अगले 4 से 5 दिनों तक बादल छाए रहेंगे. 04 और 05 जुलाई को अधिकतम तापमान 29-30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जो 06 और 07 जुलाई को गिरकर 28 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है. मौसम विभाग ने किसानों के लिए सुझाव दिया है कि यह समय खरीफ फसलों की तैयारी के लिए अनुकूल है. नमी की उपलब्धता को देखते हुए किसान कृषि वैज्ञानिकों के परामर्श से खेती के कार्य कर सकते हैं. हालांकि, तेज हवाओं के दौरान बागवानी फसलों में सावधानी बरतें और वज्रपात से सुरक्षित रहें.


