Click Here
Click Here
Click Here

राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में 8 साल से तैनात हैं सैकड़ों पदाधिकारी, शहर की रोशनी देखना हुआ मुश्किल

Ranchi: झारखंड के नक्सल प्रभावित जिलों में सैकड़ो से ज्यादा पुलिस पदाधिकारी 8 साल से एक ही जगह पर तैनात हैं. यह...

राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में 8 साल से तैनात हैं सैकड़ों

Ranchi: झारखंड के नक्सल प्रभावित जिलों में सैकड़ो से ज्यादा पुलिस पदाधिकारी 8 साल से एक ही जगह पर तैनात हैं. यह सभी पुलिस पदाधिकारी नक्सल उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब तक निभा रहे हैं. लेकिन इनका दर्द समझने वाला कोई नहीं है. जिसके कारण विभिन्न जिलों से कई पुलिस पदाधिकारी अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. नक्सल प्रभावित जिलों में कानून व्यवस्था और सुरक्षा को दुरुस्त रखने वाले पुलिस पदाधिकारी का दर्द अब छलकने लगा है. राज्य के विभिन्न उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर लातेहार, खूंटी, सिमडेगा, चाईबासा आदि जैसे जिलों में सैकड़ों ऐसे पुलिस पदाधिकारी  हैं, जो पिछले आठ-आठ वर्षों से एक ही जगह पर टिके हुए हैं. लगातार नक्सली मोर्चे पर डटे रहने के कारण इन जवानों को लंबे समय से शहर की रोशनी तक नसीब नहीं हुई है. मानसिक तनाव और पारिवारिक दूरियों से जूझ रहे इन पुलिस पदाधिकारियों ने अब पुलिस मुख्यालय और झारखंड पुलिस एसोसिएशन पर उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करने का बड़ा आरोप लगाया है. इस संवेदनशील मामले पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन की लातेहार शाखा के वरिष्ठ पदाधिकारी जगत प्रकाश ने गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है. जगत प्रकाश ने कहा कि सुदूर और दुर्गम नक्सल क्षेत्रों में रात-दिन जान हथेली पर रखकर सेवा देने वाले पुलिस जवानों के साथ न्याय नहीं हो रहा है. उन्होंने हुए कहा कि लंबे समय से एक ही नक्सल क्षेत्र में जमे जवानों के तबादले की फाइलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों और पुलिस नियमावली का उल्लंघन है.

पुलिस एसोसिएशन की सुस्त कार्यशैली पर भी उठे सवाल

मामले में केवल पुलिस मुख्यालय ही नहीं, बल्कि पुलिस पदाधिकारियों  के हितों की रक्षा करने का दावा करने वाली संस्था पुलिस एसोसिएशन भी कटघरे में है. आरोप है कि एसोसिएशन के ढुलमुल और सुस्त रवैये के कारण पुलिस मुख्यालय इन जवानों की तकलीफों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है. एसोसिएशन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस गंभीर मुद्दे को सही मंच पर मजबूती से नहीं उठाने के कारण सैकड़ों जवानों का भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य अधर में लटका हुआ है. निचले स्तर के पुलिस पदाधिकारियों का कहना है कि एसोसिएशन सिर्फ नाम के लिए काम कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस जवानों की सुनने वाला कोई नहीं है.

पारिवारिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे जवान

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस पदधिकारियों का कहना है कि लगातार आठ वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में रहने के कारण वे गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. उनके बच्चों की शिक्षा, बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख और सामाजिक जीवन पूरी तरह से ठप हो चुका है. पुलिसिंग में उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती की एक निश्चित समय-सीमा होती है, जिसके बाद जवानों को सामान्य या शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए. लेकिन झारखंड में इस नीति का पालन पूरी तरह से ठप नजर आ रहा है.

मुख्यालय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग

लातेहार शाखा के पदाधिकारियों ने मांग की है कि पुलिस मुख्यालय तुरंत इस मामले का संज्ञान लें. कई पुलिस पदाधिकारियों ने कहा कि तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो जवानों का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा, जिसका सीधा असर राज्य की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है.

झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष का बयान

इस मामले को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष राहुल मुर्मू ने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात पुलिस पदाधिकारियों की समस्या के बारे में पुलिस मुख्यालय को अवगत कराया गया है. हालांकि अब तक पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया है. झारखंड पुलिस एसोसिएशन सभी पुलिस पदाधिकारियों के हित को ध्यान में रखते हुए और उनकी परेशानियों से पुलिस मुख्यालय को लगातार अवगत कराता रहा है.

AlsoRead:झारखंड बनेगा विकास का नया पावरहाउस: औद्योगिक और टेक्सटाइल नीतियों से खुलेगी समृद्धि की नई राह

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *