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सरायकेला : रसुनिया गांव की सड़क चार साल बाद भी अधूरी, ग्रामीणों में नाराजगी

Saraikela : जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत रसुनिया गांव की सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. 22 फरवरी 2022...

Saraikela : जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत रसुनिया गांव की सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. 22 फरवरी 2022 को जिस सड़क का शिलान्यास हुआ था, चार साल बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ. वहीं दूसरे क्षेत्र में 8 महीने के भीतर टेंडर जारी होने से ग्रामीण सवाल कर रहे हैं कि विकास में भेदभाव क्यों. ग्रामीणों का कहना है कि रसुनिया गांव की सड़क का शिलान्यास बड़े स्तर पर किया गया था, लेकिन आज तक निर्माण कार्य जमीन पर नहीं दिखा. इसी बीच कपाली नगर परिषद क्षेत्र में 13 नवंबर 2025 को 6 सड़कों की मांग रखी गई और 09 जून 2026 को सभी 6 सड़कों के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया. इसी तुलना को लेकर ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या विकास कार्यों में समानता बरती जा रही है या पक्षपात हो रहा है. क्या वोट बैंक की राजनीति हो रही है और एक विशेष वर्ग को खुश करने के लिए बाकियों की अनदेखी की जा रही है.

ग्रामीणों के मुख्य सवाल:

  • शिलान्यास के चार वर्ष बाद भी सड़क निर्माण शुरू क्यों नहीं हुआ
  • जब दूसरे क्षेत्र में कुछ महीनों में टेंडर जारी हो सकता है तो रसुनिया की सड़क अधूरी क्यों है
  • रसुनिया और आसपास के गांवों को पक्की सड़क कब मिलेगी

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार बरसात में यह सड़क कीचड़ और जलभराव के कारण पूरी तरह प्रभावित हो जाती है. इसी रास्ते से पियालडीह, रुयानी, हाथीनादा, रामायगोड़ा और रसुनिया के पांचों टोला के हजारों लोग रोज आते-जाते हैं. यही मार्ग इन गांवों को शहर से जोड़ने वाला एकमात्र मुख्य संपर्क मार्ग है. इसी रास्ते से छात्र-छात्राएं स्कूल-कॉलेज जाते हैं, मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, किसान उपज बाजार ले जाते हैं और मजदूर रोजी-रोटी के लिए शहर आते-जाते हैं. गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत होती है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण कई बार वाहन फंस जाते हैं और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन का अध्यक्ष राकेश रंजन महतो रासुनिया गांव के के निवासी साथ ही ग्रामीनो कहना हे हमें किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं है. हम सिर्फ दूसरे गांवों की तरह समय पर और बराबर विकास चाहते हैं. बरसात में यहां से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है.

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि रसुनिया गांव की सड़क का निर्माण कार्य अविलंब शुरू किया जाए. परियोजना में देरी की जिम्मेदारी तय हो, निर्माण शुरू होने की स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक की जाए और बरसात को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था या अस्थायी मरम्मत कर राहत दी जाए. यदि 2022 में शिलान्यास हो चुका था तो आज तक काम शुरू क्यों नहीं हुआ. और जब दूसरे क्षेत्रों में प्रस्ताव से टेंडर तक की प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी हो सकती है तो रसुनिया के लोगों को वर्षों इंतजार क्यों करना पड़ रहा है. ग्रामीण अब प्रशासन से जवाब और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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