Ranchi: बोकारो के कनारी गांव में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. चार याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन का उपयोग वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला. बताया गया कि वर्ष 1956 से 1981 के बीच अलग-अलग चरणों में लगभग 2700 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 2008 के पुराने अधिग्रहण का हवाला देकर अब भी उनकी जमीन का उपयोग किया जा रहा है, जबकि उचित मुआवजा नहीं दिया गया. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष रखी गई. रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए.
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बोकारो स्टील लिमिटेड और राज्य सरकार के रुख में विरोधाभास
कोर्ट में बोकारो स्टील लिमिटेड (BSL) और राज्य सरकार के रुख में विरोधाभास भी देखने को मिला. BSL ने स्वीकार किया कि कई लोगों को भूमि का मुआवजा नहीं मिला, जबकि राज्य सरकार ने ‘पंजी-2’ के रिकॉर्ड को लेकर अलग रुख अपनाया. पहले सरकार ने इस रजिस्टर में प्रविष्टि होने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बाद में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की दलील दी गई. मामले में यह भी बताया गया कि अब कनारी गांव में करीब 560 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि जिनकी जमीन का उपयोग किया गया है, उन्हें विधि के अनुसार मुआवजा दिया जाए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
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