SAURAV SINGH
Ranchi: झारखंड में नशीली दवाओं और अवैध पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट’ (PITNDPS Act) के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है. पिछले तीन वर्षों (2024 से 2026 तक) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राज्य के विभिन्न जिलों से कुल 50 निरोधक (डिटेंशन) प्रस्ताव शुरू किए गए हैं, जिनमें से देवघर और चतरा जिले सबसे आगे रहे हैं.

साल 2024 में देवघर और चतरा में हुई सबसे सख्त कार्रवाई
– साल 2024 के दौरान राज्य भर में कुल 40 प्रस्ताव शुरू किए गए थे. इस वर्ष सबसे अधिक सक्रियता देवघर और चतरा जिले में देखी गई.
– देवघर जिले से सबसे अधिक 19 प्रस्ताव शुरू किए गए, जिनमें से सात हिरासत में आदेश जारी किए गए और सभी सात आदेशों को सफलतापूर्वक निष्पादित किया गया. राज्य सलाहकार बोर्ड द्वारा इनमें से एक मामले की पुष्टि की गई.
– चतरा से सात प्रस्ताव शुरू किए गए, जिनमें से पांच हिरासत आदेश जारी हुए और तीन आदेश निष्पादित किए गए. इन सभी 3 मामलों को राज्य सलाहकार बोर्ड द्वारा मंजूरी दी गई.
– इसके अलावा रांची से पांच सराइकेला खरसावां से तीन हज़ारीबाग से तीन जमशेदपुर से दो और खूंटी से एक प्रस्ताव आया, हालांकि इन जिलों में कोई हिरासत आदेश जारी नहीं हुआ.
– कुल 40 प्रस्तावों में से 12 हिरासत आदेश जारी हुए, 10 निष्पादित हुए और चार को बोर्ड की मंजूरी मिली.
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साल 2025 मामलों में आई भारी कमी
साल 2025 में PITNDPS एक्ट के तहत मामलों में काफी गिरावट दर्ज की गई. इस साल पूरे राज्य से केवल छह प्रस्ताव ही सामने आए.
खूंटी से दो और जमशेदपुर से दो प्रस्ताव आए. चतरा और पाकुड़ से एक-एक प्रस्ताव की शुरुआत की गई. हालांकि, इस वर्ष किसी भी जिले में कोई औपचारिक हिरासत आदेश जारी या निष्पादित नहीं किया जा सका.
साल 2026 में चतरा फिर रहा आगे
– साल 2026 में (अब तक के आंकड़ों के अनुसार) में राज्य में कुल चार प्रस्ताव शुरू किए गए हैं. इस वर्ष चतरा जिले से दो प्रस्ताव आए और दोनों मामलों में तत्परता दिखाते हुए दो हिरासत आदेश भी जारी किए जा चुके हैं.
– सराइकेला और पलामू जिलों से एक-एक प्रस्ताव शुरू हुआ, लेकिन फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं हुआ है.
– तीनों सालों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो चतरा और देवघर झारखंड में ड्रग्स और प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं. जहां देवघर ने 2024 में सबसे बड़ी कार्रवाई की, वहीं चतरा जिला 2024 से लेकर 2026 तक लगातार सक्रिय बना हुआ है. प्रशासन इन कानूनों के तहत अपराधियों को हिरासत में लेकर राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
जानिए क्या होता है पिट एनडीपीएस एक्ट?
पिट यानी पीआइटी एनडीपीएस एक्ट 1988, उन गंभीर नशे का कारोबार करने वाले अपराधियों पर लगाया जाता है, जो लगातार इसमें शामिल पाए जाते हैं। यह कार्रवाई शासन की ओर से की जाती है. यह उन अपराधियों के खिलाफ लगाया जाता है, जिनका जेल में बंद किया जाना जरूरी है.


