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News Wave खासः राज्य के सरकारी कामकाज में स्पेस साइंस का दखल:31 प्रोजेक्ट्स से पारदर्शी हो रहा झारखंड का प्रशासन

Ranchi: झारखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ) आज तकनीक के माध्यम से राज्य के विकास की धुरी बन चुका...

राज्य के सरकारी कामकाज में स्पेस साइंस का दखल
झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर

Ranchi: झारखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ) आज तकनीक के माध्यम से राज्य के विकास की धुरी बन चुका है. सुदूर अंतरिक्ष से प्राप्त उपग्रह तस्वीरों और अत्याधुनिक जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआइएस) का उपयोग करके झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर न केवल शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बना रहा है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी डिजिटल रूप से सरल बना रहा है. वर्तमान में झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर की 31 महत्वपूर्ण परियोजनाएं राज्य के भविष्य को बदलने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं.

डिजिटल भूमि प्रबंधन: एक नई क्रांति

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सहयोग से झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत झारखंड के गांवों के कैडस्ट्रल मानचित्रों का डिजिटलीकरण और जियो-रेफरेंसिंग कर रहा है. इसके साथ ही इंडेक्स रजिस्टरों के डिजिटलीकरण का कार्य भी जोर-शोर से जारी है. इसका सीधा लाभ यह है कि भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और आम आदमी घर बैठे अपनी जमीन का ब्यौरा प्राप्त कर सकेगा.

ग्रामीण विकास और सड़क कनेक्टिविटी

झारखंड के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने कमर कसी है. ब्लॉक रूरल रोड प्लान  और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों की निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. ये परियोजनाएं सुनिश्चित कर रही हैं कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता बनी रहे और सुदूरवर्ती इलाकों तक कनेक्टिविटी सुगम हो.

कृषि और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान

किसानों की उन्नति के लिए झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर की फसल परियोजना एक गेम-चेंजर साबित हो रही है. उपग्रहों और एग्रो-मेटियोरोलॉजी की मदद से फसल उत्पादन का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा रहा है, जिससे कृषि नीति निर्धारण में मदद मिलती है. वहीं, सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के अंतर्गत नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्रों का मूल्यांकन और जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर पेयजल योजनाओं की निगरानी का कार्य भी युद्धस्तर पर चल रहा है.

स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल पोर्टल

  • स्वास्थ्य और पोषण: शहरी स्वास्थ्य की भेद्यता मैपिंग भी की जा रही है.
  • प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण: गृह विभाग के लिए जीआइएस आधारित आपदा प्रबंधन प्रणाली और पुलिस मुख्यालय के लिए विशेष जीआइएस सेल का निर्माण किया गया है, जो आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था में एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
  • औद्योगिक और तकनीकी सेवाएं: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली’ और मोबाइल टावर-ओएफसी के लिए ऑनलाइन अनुमति प्रणाली का विकास ई-गवर्नेंस की दिशा में बड़े कदम हैं.

आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय निगरानी

डिजर्टिफिकेशन और लैंड डिग्रेडेशन (मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण) के आकलन से लेकर, वन आवरण की निगरानी के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह डेटा का उपयोग और बिजली  की घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने वाली परियोजनाएं राज्य को आपदाओं से सुरक्षित रखने में मदद कर रही हैं. इसके अलावा, वेटलैंड (आर्द्रभूमि) का इन्वेंट्री और मूल्यांकन का दूसरा चरण भी प्रगति पर है.

शिक्षा और आउटरीच कार्यक्रम

तकनीक के प्रसार के लिए झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान , देहरादून के साथ मिलकर रिमोट सेंसिंग और जीआइएस  के तहत डिस्टेंस एजुकेशन कार्यक्रम शुरू किया है. इसका उद्देश्य युवाओं को भविष्य की इन महत्वपूर्ण तकनीकों में दक्ष बनाना है.

जन-केंद्रित और डिजिटल पहुंच

मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड, युवा मामले विभाग और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण  के लिए पोर्टल और मोबाइल ऐप का निर्माण यह दर्शाता है कि झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर तकनीक का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाना चाहता है. इसके अतिरिक्त, राज्य के लिए झारखंड स्टेट स्पेशल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और संपूर्ण ‘झारखंड स्टेट जीआइएस का निर्माण पूरे राज्य के डेटा को एक छत के नीचे लाने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है.

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