NewsWave Desk: JEE Advanced की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का सपना होता है IIT में दाखिला लेना, लेकिन बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले गुंजन कुमार के लिए यह सपना आसान नहीं था. परीक्षा से कुछ महीने पहले गंभीर बीमारी ने उनकी जिंदगी की रफ्तार थाम दी. करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. इस मुश्किल दौर में उनकी मां ने बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और आखिरकार गुंजन ने JEE Advanced में शानदार सफलता हासिल करते हुए IIT Delhi के Computer Science विभाग में प्रवेश पा लिया.
कोटा से शुरू हुआ IIT का सफर
सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार वर्ष 2023 में JEE की तैयारी के लिए कोटा पहुंचे थे. IIT के टॉपर्स से प्रेरित होकर उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना देखा और पूरी मेहनत से तैयारी शुरू कर दी. सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था, लेकिन किस्मत ने अचानक उनकी परीक्षा ले ली.

बीमारी ने रोक दी पढ़ाई
अक्टूबर 2025 में गुंजन को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ. जांच में पता चला कि उन्हें न्यूमोथोरैक्स (Collapsed Lung) की गंभीर समस्या है, जिसमें फेफड़ा सिकुड़ जाता है. डॉक्टरों ने उन्हें लगभग तीन महीने तक पूरी तरह बेड रेस्ट की सलाह दी. इस दौरान उनका कोचिंग जाना बंद हो गया और JEE की तैयारी रुकने लगी.
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जब मां बनीं बेटे की क्लासमेट
ऐसे कठिन समय में गुंजन की मां ने बेटे का हौसला टूटने नहीं दिया. बीएड कर चुकीं उनकी मां रोज ऑनलाइन JEE की क्लास अटेंड करतीं, हर लेक्चर के विस्तृत नोट्स अपने हाथों से तैयार करतीं और बाद में वही नोट्स गुंजन को पढ़ातीं. बेटे के सपने को पूरा करने के लिए मां ने खुद छात्र बनकर पढ़ाई की, ताकि बीमारी के कारण उसकी तैयारी प्रभावित न हो.
कमजोर नजर भी नहीं बनी रुकावट
गुंजन सिर्फ बीमारी से ही नहीं, बल्कि 70 प्रतिशत से अधिक दृष्टि संबंधी समस्या से भी जूझ रहे हैं. वह 9.5 पावर का चश्मा पहनते हैं. इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी शारीरिक चुनौतियों को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया.
JEE Advanced में मिली बड़ी सफलता
गुंजन ने JEE Main में 91.8 परसेंटाइल हासिल किया. इसके बाद JEE Advanced में OBC-PwD श्रेणी में 50वीं रैंक और कॉमन PwD रैंक 120 प्राप्त की. इस सफलता के साथ उनका IIT Delhi में Computer Science पढ़ने का सपना साकार हो गया.
संघर्ष और मां की ममता की मिसाल
गुंजन कुमार की सफलता सिर्फ उनकी मेहनत की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के समर्पण और त्याग की भी मिसाल है. यह कहानी बताती है कि जब परिवार का साथ, मजबूत इरादे और मेहनत एक साथ हों, तो सबसे कठिन परिस्थितियां भी सपनों का रास्ता नहीं रोक पातीं. कई बार किसी छात्र की सफलता के पीछे उसके माता-पिता का अनदेखा संघर्ष भी उतना ही बड़ा होता है, जितनी उसकी अपनी मेहनत.


