गैस सिलेंडर को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं : हरदीप पुरी

Delhi : पश्चिम एशिया संकट के बाद देश में गैस की किल्लत के मुद्दे पर लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह...

Delhi : पश्चिम एशिया संकट के बाद देश में गैस की किल्लत के मुद्दे पर लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बयान दिया. उन्होंने कहा कि दुनिया के ऊर्जा इतिहास में शायद ही कभी ऐसा समय आया हो जैसा अभी पश्चिम एशिया के संकट के कारण देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद गंभीर मानी जा रही है. हरदीप पुरी ने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता यह है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों की रसोई में ईंधन की कमी न हो.

देश में अभी पर्याप्त गैस : हरदीप पुरी

हरदीप पुरी ने अपने बयान में कहा, ‘होर्मुज से 20 प्रतिशत आवाजाही प्रभावित हुई है, 40 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देश से आ रहा हैं. हमारे पास पर्याप्त कच्चा तेल है. केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि भारत की क्रूड सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है और भारत में पेट्रेाल-डीजल की किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं है. देश में अभी पर्याप्त गैस है. गैस की किल्लत को लेकर अफवाहों के बीच केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीएनजी की सप्लाई 100 प्रतिशत जारी है, भारत में एलएनजी के कार्गो रोज आ रहे हैं. गैस सिलेंडर को लेकर किसी भी तरह से पैनिक होने की जरूरत नहीं है, पैनिक होने की वजह से डिमांड बढ़ी है.

गैस की कालाबाजारी रोकने के निर्देश

इस दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि देश में एलपीजी का उत्पादन 28 फीसदी बढ़ा है और देश लंबे समय तक इस संकट से निकटने को लेकर पूरी तरह से तैयार है. पेट्रोलियम मंत्री ने आगे कहा कि भारत अभी भी कनाडा, नार्वे और रूस से तेल ले रहा है और हमने गैस की कालाबाजारी को रोकने के निर्देश जारी किए है.

‘होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, इतिहास में पहली बार’

पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है. उनके अनुसार, दर्ज इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि यह समुद्री रास्ता व्यावसायिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद जैसा हो गया है. यह वही मार्ग है जिससे दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चा तेल पहुंचता है.

सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही : हरदीप पुरी

हरदीप पुरी ने संसद में कहा कि भारत इस संघर्ष का कारण नहीं है, लेकिन इसके असर से बच पाना भी संभव नहीं है. ऐसे हालात में भारत सरकार को ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सावधानी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं ताकि आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े.

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