Ranchi: देश में साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे मासूम लोगों को ठगने के लिए हर दिन नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं, हालिया रिपोर्टों के अनुसार, साइबर क्राइम के दो नए ट्रेंड्स डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट स्कैम तेजी से उभरकर सामने आए हैं. इन तरीकों का इस्तेमाल कर जालसाज लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि ये दोनों स्कैम कैसे काम करते हैं और आप इनसे कैसे बच सकते हैं.
जाने क्या डिजिटल अरेस्ट स्कैम
इस तरह के फ्रॉड में अपराधी व्यक्ति को मानसिक रूप से इतना डरा देते हैं कि वह बिना सोचे-समझे उनके झांसे में आ जाता है. इसकी कार्यप्रणाली कुछ इस तरह होती है. सबसे पहले पीड़ितों के पास एक स्पूफ़्ड (फर्जी) कॉल आता है, जिसमें कॉलर खुद को सीबीआई पुलिस या नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जैसी बड़ी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताता है. पीड़ित को डराया जाता है कि उसकी पहचान का किसी बड़े अपराध जैसे मनी लॉन्ड्रिंग (धोखाधड़ी) या ड्रग्स केस में दुरुपयोग हुआ है. मामले को गंभीर दिखाने के लिए कॉल को तुरंत एक वीडियो कॉल पर ट्रांसफर कर दिया जाता है. वीडियो पर वर्दी पहने कुछ फर्जी अधिकारी दिखाई देते हैं ताकि पीड़ित को यह बिल्कुल सच लगे. अपराधियों द्वारा पीड़ित को धमकी दी जाती है कि यदि उसने उनके साथ सहयोग नहीं किया, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा. अंत में पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया जाता है और वेरिफिकेशन या सुरक्षित कस्टडी के नाम पर उनके बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है.

जाने क्या है इन्वेस्टमेंट स्कैम
- – यह घोटाला लोगों के मन में रातों-रात अमीर बनने या अतिरिक्त कमाई करने के लालच का फायदा उठाकर किया जाता है. इसकी प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है.
- – इस स्कैम की शुरुआत सोशल मीडिया या व्हाट्सएप के जरिए होती है, जहां लोगों को पार्ट-टाइम जॉब या ट्रेडिंग टिप्स का झांसा दिया जाता है.
- – इसके बाद पीड़ित को कुछ ऐसे ग्रुप्स में शामिल किया जाता है, जहां नियमित रूप से फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता है.
- – पीड़ितों को ऐसे ऐप्स या वेबसाइटों पर निवेश करने के लिए कहा जाता है, जो हूबहू असली स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स की तरह दिखाई देती हैं.
- – शुरुआत में, जालसाज पीड़ितों को थोड़ा बहुत मुनाफा निकालने की अनुमति देते हैं ताकि उनका विश्वास पूरी तरह पक्का हो जाए.
- – जैसे ही पीड़ित बड़ा निवेश करता है, उसके पैसे निकालने के विकल्प को ब्लॉक कर दिया जाता है और ठग उससे पूरी तरह संपर्क तोड़ लेते हैं.
आम लोगों से अपील
कानून प्रवर्तन एजेंसियां (जैसे पुलिस, सीबीआई, एनसीबी) कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करतीं और न ही पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती हैं. यदि आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत घबराने के बजाय स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं. किसी भी अनजान ऐप या अनजान व्यक्ति के कहने पर भारी निवेश करने से बचें.
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