Hazaribagh : अदालतों के तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण और डिजिटल तकनीक के इस दौर में हजारीबाग के वकीलों को भी हाईटेक बनाने की कवायद शुरू हो गई है. सर्वोच्च न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय और ज्यूडिशियल एकेडमी रांची के दिशा-निर्देश पर हजारीबाग बार संघ के सभागार में ई-कोर्ट प्रणाली से संबंधित एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इस शिविर में जिले के भारी संख्या में अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया और अदालतों की विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं तथा डिजिटल टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी प्राप्त की.
नई तकनीक से न्यायिक कार्य होगा अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस गरिमामय अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी, सिविल कोर्ट के निबंधक दिव्यम चौधरी, बार संघ के अध्यक्ष राजकुमार और सचिव सुमन कुमार सिंह भी मुख्य रूप से मंच पर उपस्थित रहे. अदालतों के कंप्यूटरीकरण और वकीलों के लिए इसकी अनिवार्यता को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया. कहा कि आज देश भर के न्यायालयों में तेजी से आधुनिकीकरण और कंप्यूटरीकरण की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे बदलते परिवेश में प्रत्येक अधिवक्ता और उनके सहायकों (मुंशियों) के लिए ई-कोर्ट प्रणाली की बारीकियों को समझना बेहद आवश्यक हो गया है. नई तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जुड़ने पर हमारा न्यायिक कार्य न केवल अधिक सरल और पारदर्शी बनेगा, बल्कि मामलों के निष्पादन में भी अत्यधिक प्रभावशीलता आएगी.

मास्टर ट्रेनर्स ने सिखाए ई-फाइलिंग के गुर, अब ऑनलाइन मिलेगी नकल
प्रशिक्षण सत्र के दौरान बतौर मास्टर ट्रेनर अधिवक्ता गौरव सहाय और अधिवक्ता दीपक कुमार गुप्ता ने अलग-अलग सत्रों में ई-कोर्ट की सभी प्रमुख सुविधाओं का लाइव डेमो दिया. उन्होंने वकीलों को ई-पेमेंट करने, मुकदमों की ऑनलाइन ई-फाइलिंग करने, ई-कोर्ट पोर्टल पर स्वयं का अधिवक्ता पंजीकरण करने तथा आधिकारिक मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे वादों (केस स्टेटस) की जानकारी प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया सिखाई. वकीलों और मुवक्किलों को मिलने वाली बड़ी राहत का जिक्र करते हुए शिविर में बताया गया अब सिविल कोर्ट हजारीबाग से जारी होने वाली किसी भी केस की अभिप्रमाणित प्रतियों के लिए वकीलों को अदालती टिकटों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. अब इसके लिए सीधे ऑनलाइन भुगतान कर डिजिटल तरीके से प्रतियां प्राप्त की जा सकती हैं. इससे पहले अदालतों में अक्सर होने वाली टिकट की कमी या किल्लत के कारण नकल प्राप्त करने में वकीलों और आम जनता को जो भारी कठिनाई होती थी, उससे अब हमेशा के लिए बड़ी राहत मिल जाएगी। सत्र के अंत में मास्टर ट्रेनर्स ने उपस्थित सभी प्रतिभागी अधिवक्ताओं की तकनीकी जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान भी किया.
Also Read : साहस और पहचान की नई कहानी: पूर्व क्रिकेटर संजय बांगर की बेटी अनाया का प्रेरणादायक सफर


