Hazaribagh: राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 में जिले के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत प्रत्येक छात्र-छात्रा की कम-से-कम एक बार स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है. इसके लिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने संयुक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित करने का निर्देश उपायुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सिविल सर्जन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों को दिया गया है.
पिछले वर्ष लक्ष्य से पीछे रही स्वास्थ्य जांच
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नामांकित विद्यार्थियों में केवल 69 प्रतिशत बच्चों की ही स्वास्थ्य जांच हो सकी थी. इस स्थिति पर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड की बैठक में नाराजगी जताई गई थी. इसके बाद वर्ष 2026-27 में सभी विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत स्वास्थ्य स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया गया.

आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मोबाइल हेल्थ को मिली जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हेल्थ टीमें मिलकर विद्यालयों में स्वास्थ्य जांच करेंगी. आयुष्मान आरोग्य मंदिर अपने दो किलोमीटर के दायरे में आने वाले विद्यालयों की जांच करेगा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पांच किलोमीटर तक के विद्यालयों की जिम्मेदारी निभाएगा. शेष विद्यालयों में आरबीएसके की मोबाइल हेल्थ टीम स्वास्थ्य परीक्षण करेगी.
हर प्रखंड में बनेगी त्रैमासिक कार्ययोजना
सरकार ने प्रत्येक प्रखंड में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से त्रैमासिक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है. उपायुक्त स्तर पर नियमित समीक्षा होगी ताकि अभियान समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके. जिन विद्यालयों में तीसरी तिमाही तक स्वास्थ्य जांच पूरी नहीं हो पाएगी, वहां चौथी तिमाही में प्राथमिकता के आधार पर जांच कराई जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में नजदीकी आयुष्मान आरोग्य मंदिर या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा.
स्वस्थ विद्यार्थी, बेहतर शिक्षा का आधार
सरकार का मानना है कि स्वस्थ विद्यार्थी ही बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और भविष्य में देश के सक्षम नागरिक बन सकते हैं. विशेषज्ञों का भी आकलन है कि यदि बच्चों का स्वास्थ्य स्तर बेहतर होगा तो उनकी सीखने की क्षमता, उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होगा.
जिले में अभियान को लेकर तैयारी शुरू
हजारीबाग में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग ने इस अभियान की तैयारी शुरू कर दी है. विद्यालयवार स्वास्थ्य जांच की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि तय समय सीमा के भीतर जिले के प्रत्येक छात्र-छात्रा की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा सके. अभियान के दौरान बच्चों में बीमारी की पहचान, आवश्यक उपचार और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी.
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