Giridih: ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को आत्मनिर्भरता और रोजगार का मजबूत आधार बनाने की दिशा में झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना प्रभावी साबित हो रही है. गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड अंतर्गत पतरोडीह गांव निवासी प्रदम कुमार दास इसकी जीवंत मिसाल बनकर सामने आए हैं. सरकारी योजना, विभागीय मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने सीमित संसाधनों से शुरू किया गया डेयरी व्यवसाय आज एक सफल उद्यम में बदल दिया है. जिला गव्य विकास कार्यालय, गिरिडीह द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत प्रदम कुमार दास को 10 दुधारू गायें उपलब्ध कराई गई थीं. इससे पहले उनके पास केवल दो गाय थीं और परिवार की आय का कोई स्थायी साधन नहीं था. सीमित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया.
डेयरी फार्म में करीब 15 गाय एवं भैंस हैं मौजूद
आज उनके डेयरी फार्म में करीब 15 गाय एवं भैंस हैं, जिनमें जर्सी और साहीवाल नस्ल की गायें तथा मुर्राह नस्ल की भैंसें शामिल हैं. इनके फार्म से प्रतिदिन लगभग 100 किलोग्राम दूध का उत्पादन हो रहा है. उत्पादित दूध का संग्रहण और विपणन झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) के माध्यम से किया जाता है, जबकि स्थानीय बाजार में भी दूध की बिक्री कर वे अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन की लागत कम करने के लिए प्रदम कुमार दास ने अपने खेत में हरे चारे की खेती भी शुरू की है. इससे पशुओं को संतुलित आहार मिलने के साथ दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी हासिल करने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), सिलीगुड़ी से विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया. प्रशिक्षण से मिले तकनीकी ज्ञान को अपनाकर उन्होंने अपने डेयरी फार्म को आधुनिक स्वरूप दिया और उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ाई.
लगभग 30 पशुपालक किसान हैं जुड़े
उनकी कार्यकुशलता और बेहतर प्रबंधन क्षमता को देखते हुए झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) ने उन्हें पतरोडीह बल्क मिल्क कूलर (BMC) के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी है. वर्तमान में इस केंद्र से क्षेत्र के लगभग 30 पशुपालक किसान जुड़े हुए हैं. यहां प्रतिदिन करीब 1000 लीटर दूध का संग्रहण कर देवघर डेयरी भेजा जाता है, जिससे किसानों को दूध बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ है और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है. प्रदम कुमार दास अब केवल सफल डेयरी उद्यमी ही नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं. वे गांव और आसपास के किसानों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन अपनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा सहकारी दुग्ध व्यवसाय से जुड़ने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं. उनके मार्गदर्शन से कई ग्रामीण डेयरी व्यवसाय अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
रोजगार और समृद्धि का मजबूत माध्यम बन सकता है ये
जिला गव्य विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना, पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना तथा किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. प्रदम कुमार दास की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और मेहनत के साथ वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी डेयरी व्यवसाय रोजगार और समृद्धि का मजबूत माध्यम बन सकता है.
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