CUJ के प्रोफेसर की पुस्तक को मिला सरकारी कॉपीराइट, कृषि नीति पर शोध को राष्ट्रीय पहचान

Ranchi: केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शशांक कुलकर्णी की पुस्तक “Farmers, Policy,...

Ranchi: केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शशांक कुलकर्णी की पुस्तक “Farmers, Policy, and Power: Understanding Agricultural Political Frameworks” को भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय ने कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत आधिकारिक कॉपीराइट पंजीकरण प्रदान किया है. इसे कृषि नीति और सार्वजनिक प्रशासन के क्षेत्र में उनके शोध कार्य को मिली बड़ी राष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है.

कृषि नीति और किसानों की चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन

डॉ. कुलकर्णी की पुस्तक में भारत की कृषि व्यवस्था, सरकारी नीतियों, किसानों की समस्याओं और कृषि विकास से जुड़े राजनीतिक व प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन किया गया है. इसमें यह बताया गया है कि कृषि नीतियां कैसे बनती हैं, उनका किसानों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है और नीति निर्माण को अधिक प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है.

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शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी पुस्तक

यह पुस्तक शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री मानी जा रही है. इसमें कृषि सुधार, सुशासन, ग्रामीण विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है.

एम. एस. स्वामीनाथन के साथ कर चुके हैं काम 

डॉ. कुलकर्णी लंबे समय से कृषि नीति, ग्रामीण विकास और लोक प्रशासन के क्षेत्र में शोध कर रहे हैं. उन्हें भारत रत्न और हरित क्रांति के जनक प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन के साथ भी काम करने का अवसर मिला, जिसका प्रभाव उनके शोध कार्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

12 पुस्तकें और कई शोधपत्र हो चुके हैं प्रकाशित 

अब तक डॉ. कुलकर्णी सार्वजनिक नीति, कृषि नीति, सुशासन और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर 12 पुस्तकें लिख चुके हैं. उनके कई शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. इसके अलावा कृषि नीति और विकास से जुड़े उनके कार्यों के लिए उन्हें दो बौद्धिक संपदा अधिकार भी मिल चुके हैं.

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