विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि अगर कोई पुरुष अपनी पहली शादी की बात छिपाकर किसी विधवा महिला से शादी का झांसा देता है और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो महिला की सहमति तथ्य की गलतफहमी के तहत अमान्य मानी जाएगी.
कानूनन दुष्कर्म
अदालत ने अपने आदेश में ऐसे कृत्य को कानूनन दुष्कर्म की श्रेणी में माना है. यह फैसला हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने रमेश साहू की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. अदालत ने आरोपी रमेश साहू के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) और निचली अदालत द्वारा संज्ञान लिए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया. इस मामले में पीड़िता एक विधवा महिला है जिसके पति का निधन हो चुका था. आरोपी रमेश साहू ने खुद को कुंवारा बताते हुए पीड़िता के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और आरोपी ने महिला को अपने प्रेम जाल में फंसाया और शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा. कुछ समय बाद जब पीड़िता ने उस पर शादी करने का दबाव बनाया तो आरोपी टालमटोल करने लगा. बाद में पीड़िता को पता चला कि रमेश साहू पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं. खुद के साथ हुए इस धोखे के बाद पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जिस पर निचली अदालत ने संज्ञान लिया था. आरोपी ने इसी संज्ञान आदेश को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
रमेश की याचिका कोर्ट ने की खारिज
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया और अपने आदेश में कहा कि अगर किसी महिला की सहमति तथ्य की गलतफहमी या धोखे के आधार पर ली गई है तो कानून की नजर में उसे सहमति नहीं माना जा सकता. आरोपी ने अपनी पहली शादी और बच्चों की बात छिपाई. पीड़िता को इस सच का पता होता तो वह शारीरिक संबंध बनाने की सहमति कभी नहीं देती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ शादी का वादा तोड़ने का नहीं है बल्कि शुरू से ही कपटपूर्ण इरादे से सच्चाई छिपाकर सहमति हासिल करने का है जो सीधे तौर पर दुष्कर्म की श्रेणी में आता है.
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