चाईबासा में DMFT फंड की लूट का आरोप, हेमंत सरकार श्वेत पत्र जारी करे : बाबूलाल मरांडी

Chaibasa: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के इस्तेमाल को...

Allegations of looting of DMFT funds in Chaibasa, Hemant government should issue a white paper: Babulal Marandi

Chaibasa: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के इस्तेमाल को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि खदान प्रभावित इलाकों के विकास के लिए मिले हजारों करोड़ रुपये का सही उपयोग नहीं हुआ और सरकार को इस मामले में श्वेत पत्र जारी करना चाहिए. चाईबासा जिला भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मरांडी ने कहा कि उन्होंने तीन दिनों तक खदान प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. इस दौरान लोगों से बातचीत में सामने आया कि आज भी इलाके में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से DMFT फंड की बंदरबांट हुई है. मरांडी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में चाईबासा जिले को DMFT के तहत 3,742.15 करोड़ रुपये मिले. इनमें से 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी कर दी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास दिखाई नहीं देता. उन्होंने इसे “आर्थिक अपराध” बताते हुए कहा कि सरकार बताए कि पैसा कहां और किस काम में खर्च हुआ.

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‘खर्च का पूरा विवरण DMFT पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खर्च का पूरा विवरण DMFT पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया, जबकि नियम के अनुसार सभी परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए. उन्होंने मीडिया से भी इस मामले की जांच करने और जिला प्रशासन से जवाब मांगने की अपील की. मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए DMFT फंड की शुरुआत की थी, लेकिन झारखंड में इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो सका. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. खनन क्षेत्र की नीलामी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में 434 खदानों की नीलामी हुई, जबकि झारखंड में केवल तीन खदानों की नीलामी हुई और वह भी केंद्र सरकार की ओर से कराई गई. उनका आरोप था कि राज्य सरकार ने एक भी खदान की नीलामी नहीं की, जिससे रोजगार के अवसर घटे और पलायन बढ़ा.

‘खदान प्रभावित गांवों में आज भी मूलभूत सुविधा नहीं’

मरांडी ने कहा कि ओडिशा ने बड़ी संख्या में खदानों की नीलामी कर राजस्व बढ़ाया है. उनके अनुसार वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनिज रॉयल्टी से लगभग 22 हजार करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा को 46 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए. उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिज भंडार अधिक होने के बावजूद सरकार उसकी क्षमता का लाभ नहीं उठा पा रही है. उन्होंने राज्य सरकार के विदेश दौरों और निवेश के लिए किए जा रहे एमओयू पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इनका जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं देता. मरांडी ने कहा कि खदान प्रभावित गांवों में आज भी लोग नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं, कई स्कूलों की हालत खराब है, पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों को खाट पर उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है.

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