Ranchi: अब राज्य के कल्याण पदाधिकारियों को सेवा में प्रवेश से लेकर पदोन्नति तक, हर स्तर पर अधिकारियों को अपडेट रहना होगा. नई अधिसूचना के अनुसार, सेवा में प्रवेश करने वाले प्रत्येक खंड कल्याण पदाधिकारी को अनिवार्य रूप से 8 सप्ताह का आधारभूत प्रशिक्षण लेना होगा. यह प्रशिक्षण तीन चरणों में पूरी होगी.
• प्रथम चरण (एक सप्ताह – थ्योरी): इसमें अधिकारियों को विभागीय संरचना, कार्यालयी प्रक्रिया, डेटा प्रबंधन और सबसे महत्वपूर्ण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा.
• द्वितीय चरण (पांच सप्ताह – व्यावहारिक): जिला कल्याण कार्यालयों और समेकित जनजातीय विकास अभिकरणों के अधीन अधिकारी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करेंगे. इस दौरान उनकी परफॉरमेंस की ग्रेडिंग होगी. यदि ग्रेडिंग औसत से नीचे रही, तो उस पदाधिकारी को दो सप्ताह का प्रशिक्षण फिर से दोहराना होगा.
• तृतीय चरण (दो सप्ताह – संस्थानगत): इसमें ऑफिस मैनेजमेंट, कोर्ट केस हैंडलिंग, ह्यूमन रिसोर्स, ई-ऑफिस और झारखंड सेवा संहिता जैसे जटिल विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे.
अधिकारियों के लिए लाइफलॉन्ग लर्निंग का मंत्र
सरकार ने केवल नए अधिकारियों पर ही जोर नहीं दिया है, बल्कि सेवारत अधिकारियों के लिए भी सेवाकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है. हर 6 से 8 वर्षों में, अधिकारियों को दो सप्ताह का अनिवार्य रिफ्रेशर कोर्स करना होगा. इसका उद्देश्य उनकी समस्या-समाधान की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और नेतृत्व कौशल को निखारना है. साथ ही, पदोन्नति मिलते ही अधिकारियों को 3 से 5 दिनों का विशेष प्रशिक्षण लेना होगा, ताकि वे अपनी नई जिम्मेदारी और भूमिका के साथ पूरी तरह न्याय कर सकें.
‘परफॉर्मेंस’ पर रहेगी पैनी नजर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में 90 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है. इससे कम उपस्थिति होने पर अधिकारी को न केवल दंडित किया जा सकता है, बल्कि उनकी पदोन्नति और भविष्य की करियर ग्रोथ पर भी सीधा असर पड़ सकता है. ‘ई-गवर्नेंस’ और डिजिटल वर्क कल्चर को विशेष प्राथमिकता दी गई है. इसमें ई-ऑफिस, एचआरएमएस मॉड्यूल, फाइल ट्रैकिंग सिस्टम और आई-गॉट कर्मयोगी जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं. जिससे फाइलों के निस्तारण में देरी का बहाना नहीं चलेगा, क्योंकि हर कदम पर तकनीक की निगरानी होगी.
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