News Wave Desk: विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ में आज (16 जुलाई) मां तारा की ऐतिहासिक रथयात्रा पूरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ निकाली जाएगी. विशेष वैदिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद मां तारा को नए रथ पर विराजमान कर पारंपरिक मार्ग से नगर भ्रमण कराया जाएगा. इस दौरान मां तारा अपने भक्तों को दुर्लभ दर्शन देंगी. रथयात्रा में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
इस बार नए रथ पर विराजमान होंगी मां तारा
वर्षों पुराने रथ के जर्जर हो जाने के कारण इस बार मां तारा की रथयात्रा नए रथ पर निकाली जाएगी. मंदिर समिति ने उच्च गुणवत्ता वाली सागौन की लकड़ी से नया रथ तैयार कराया है. हालांकि, रथ की ऐतिहासिक विरासत को बनाए रखने के लिए पुराने रथ के मूल पहियों और धुरी को सुरक्षित रखा गया है. पारंपरिक स्वरूप के साथ आधुनिक सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा गया है.
राज्य सरकार से मिली विशेष सहायता
पश्चिम बंगाल सरकार ने तारापीठ की रथयात्रा को राज्य की 25 ऐतिहासिक रथयात्राओं की सूची में शामिल किया है. इसके साथ ही मंदिर समिति को 5 लाख रुपये की विशेष आर्थिक सहायता दी गई है, जिससे रथ निर्माण और आयोजन को अधिक भव्य बनाया गया है.
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सुरक्षा के रहेंगे कड़े इंतजाम
रथयात्रा में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है. पूरे रूट पर पुलिस बल तैनात रहेगा. ट्रैफिक नियंत्रण, बैरिकेडिंग, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
मंदिर समिति के सचिव पुलक चट्टोपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष रथयात्रा को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया है. उनका कहना है कि सरकार की सहायता और ऐतिहासिक रथयात्राओं की सूची में शामिल होने से तारापीठ की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा धार्मिक पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा.
