JMM और CONGRESS गठबंधनः क्या कांग्रेस के कोटे वाले आयोगों को फिर से करना पड़ेगा सालों इंतजार या भरे जाएंगे खाली हुए सीट

Ranchi: कांग्रेस भले ही बार-बार विष पीकर गठबंधन निभाने की बात करता हो. लेकिन Congress और JMM के अंदर ऑल इज वेल...

Ranchi: कांग्रेस भले ही बार-बार विष पीकर गठबंधन निभाने की बात करता हो. लेकिन Congress और JMM के अंदर ऑल इज वेल नहीं है. राज्यसभा चुनाव के बाद यह बात खुल कर सामने आ गयी है. चूंकि राज्यसभा चुनाव की कमान खुद प्रदेश प्रभारी संभाल रहे थे, इसलिए चुनाव में मिली काररी शिक्सत के बाद वो चुनाव की समीक्षा भी नहीं कर पा रहे हैं. चुनाव के बाद प्रभारी के राजू झारखंड का दौरा तो किए, लेकिन उन्होंने चुनाव की समीक्षा करना मुनासिब नहीं समझा. इसलिए समझा जा सकता है कि कांग्रेस के अंदर कुछ ना कुछ खिचड़ी जरूर पक रही है. गठबंधन में लो शोल्डर वाली कांग्रेस सिर्फ JMM के फैसलों का इंतजार कर सकती है. किसी बात के लिए जिद या अपनी पसंद फिलहाल रखने की स्थिति में नहीं है.

JMM ने नहीं दिखाया बड़ा दिल तो बचेंगे कांग्रेस कोटे के सिर्फ दो आयोग

राज्य में नीरिह बनी कांग्रेस अब JMM के दरियादिली पर टिकी हुई है. कांग्रेस कोटे के सिर्फ दो ही बोर्ड सितंबर के बाद वजूद में रहेंगे बाकी सभी आयोग और बोर्ड का कार्यकाल लगभग खत्म हो चुका है. यह दो बोर्ड कृषि मार्केटिंग बोर्ड और धार्मिक न्यास बोर्ड हैं. इन दोनों का कार्यकाल पांच साल कर दिया गया है. मार्केटिंग बोर्ड के अधयक्ष रविंद्र सिंह हैं और धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष जयशंकर पाठक हैं. दोनों ही कांग्रेस पार्टी के कोटे से हैं. बाकी झारखंड राज्य गोसेवा आयोग जिसके अधयक्ष राजीव रंजन प्रसाद हैं उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है. झारखंड राज्य युवा आयोग जिनके अध्यक्ष कुमार गौरव हैं उनका भी कार्यकाल खत्म हो चुका है. अब ये सभी कांग्रेस कोटे के पदाधिकारी सरकार की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं. पार्टी पर जोर बना रहे हैं. लेकिन अभी तक कुछ भी फायदा होते नहीं दिख रहा है.

प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष पर विफलता का आरोप

कांग्रेस की इस दशा के लिए अब कांग्रेस खेमे के ही लोग प्रदेश प्रभारी के राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर विफलता का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि जब शीर्ष पदाधिकारी को ही इस बात की चिंता नहीं है तो दूसरे कार्यकर्ता क्या ही कर सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ यह भी बात हो रही है कि JMM की तरफ से कांग्रेस के आला अधिकारियों से लिस्ट मांगी गयी है. लेकिन कांग्रेस की तरफ से लिस्ट फिलहाल नहीं सौंपी गयी है. ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच इस लेट-लतीफी को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है.

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