News Wave Desk : सावन का महीना आते ही चारों ओर हरियाली और खुशियों का माहौल दिखाई देने लगता है. इस पवित्र महीने में महिलाओं के श्रृंगार का भी विशेष महत्व माना जाता है. सावन में महिलाएं पारंपरिक रूप से हरे रंग के कपड़े, चूड़ियां और मेहंदी लगाकर अपने श्रृंगार को खास बनाती हैं. मान्यता है कि सावन में किया गया श्रृंगार महिलाओं की सुंदरता के साथ-साथ सुहाग और खुशहाली से भी जुड़ा होता है.
सावन के पांच प्रमुख श्रृंगार
सावन के पांच प्रमुख श्रृंगार में सबसे पहले मेहंदी का नाम आता है. महिलाएं और युवतियां हाथों-पैरों में खूबसूरत मेहंदी लगाती हैं. मेहंदी को सावन की खुशियों और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद हरी चूड़ियों का विशेष महत्व होता है. हरा रंग हरियाली, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, इसलिए सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा काफी पुरानी है. इसके अलावा बिंदी और सिंदूर को भी सुहागिन महिलाओं के श्रृंगार का अहम हिस्सा माना जाता है. इसे वैवाहिक जीवन की खुशहाली और सुहाग का प्रतीक माना जाता है. वहीं, झुमके और अन्य कानों के आभूषण महिलाओं के श्रृंगार में चार चांद लगा देते हैं. सावन में महिलाएं पारंपरिक आभूषण पहनकर अपने रूप को और आकर्षक बनाती हैं. पांचवें प्रमुख श्रृंगार में पायल और बिछिया शामिल हैं. पैरों में पायल की छन-छन सावन के माहौल को और भी खास बना देती है. सावन में हरी साड़ी, मेहंदी, चूड़ियां और पारंपरिक आभूषणों से सजा महिलाओं का रूप हर किसी का ध्यान आकर्षित करता है. यही वजह है कि सावन का महीना महिलाओं के लिए श्रृंगार और उत्साह का विशेष महीना माना जाता है.

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