चक्रधरपुर: 8 साल से बालू संकट की मार; तीन जिलों ने दी रिपोर्ट, कोल्हान अब भी खामोश

Chakradharpur: झारखंड में पिछले करीब आठ वर्षों से जारी बालू संकट और बालू घाटों की नियमित एवं पारदर्शी टेंडर व्यवस्था को लेकर...

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बालू संकट पर तीन जिलों ने दी रिपोर्ट

Chakradharpur:  झारखंड में पिछले करीब आठ वर्षों से जारी बालू संकट और बालू घाटों की नियमित एवं पारदर्शी टेंडर व्यवस्था को लेकर उठाई गई जनहित शिकायत पर विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है. मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान की शिकायत के बाद खान निदेशालय, झारखंड रांची ने विभिन्न जिलों से रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद गुमला, सिमडेगा और जामताड़ा जिला खनन कार्यालयों ने अपनी रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध करा दी है.

तीन जिलों ने दी ई-नीलामी और कार्रवाई की जानकारी

प्राप्त रिपोर्ट में संबंधित जिलों ने बालू घाटों की स्थिति, ई-नीलामी प्रक्रिया, अधिकृत स्टॉकयार्ड और अवैध खनन के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का ब्योरा दिया है. इससे संकेत मिलता है कि राज्य स्तर पर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित तथ्यों का संकलन किया जा रहा है.

कोल्हान में बालू संकट को लेकर चिंता

मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान ने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति कोल्हान प्रमंडल, खासकर पश्चिमी सिंहभूम जिले की है. उनके अनुसार, यहां हजारों परिवार लंबे समय से बालू की समस्या से जूझ रहे हैं. निजी मकान निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना और अन्य निर्माण कार्यों के लिए लोगों को महंगे दामों पर बालू खरीदना पड़ रहा है.

छोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई का आरोप

बैरम खान ने कहा कि कई बार मजबूरी में छोटे ट्रैक्टर या अन्य वाहनों से बालू लाने वाले लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है. उन्होंने कहा कि आम जनता के लिए वैध और सुलभ बालू की व्यवस्था नहीं होने से अवैध परिवहन और कालाबाजारी को बढ़ावा मिलता है.

कोल्हान की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

उन्होंने बताया कि गुमला, सिमडेगा और जामताड़ा से विभागीय जवाब मिल चुके हैं, लेकिन कोल्हान क्षेत्र, विशेषकर पश्चिमी सिंहभूम से अब तक कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने नहीं आई है. उन्होंने मांग की कि खान निदेशालय द्वारा सभी जिलों से मांगी गई रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि राज्य में बालू संकट की वास्तविक स्थिति सामने आ सके.

मानवाधिकार आयोग और सरकार को भेजा गया ज्ञापन

बैरम खान ने बताया कि इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और खान एवं भूतत्व विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत और ज्ञापन भेजा जा चुका है. उन्होंने कहा कि विभागीय रिपोर्टों के अध्ययन के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

प्रमुख मांगें

पूरे झारखंड में पारदर्शी और नियमित ई-टेंडर व्यवस्था लागू की जाए.
पश्चिमी सिंहभूम सहित कोल्हान क्षेत्र में वैध बालू आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित हो.
सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल बालू के स्रोतों को पारदर्शी बनाया जाए.
मजदूरों, ट्रक चालकों और छोटे परिवहन व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जाए.
खान निदेशालय से प्राप्त सभी जिलों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.

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