Ranchi: झारखंड के राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए एक अहम खबर है. राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (प्राथमिक शिक्षा निदेशालय) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के प्रारंभिक शिक्षकों को एसीपी और एमएसीपी योजना का लाभ देय नहीं होगा. इस संबंध में शुक्रवार को सरकार के सचिव उमा शंकर सिंह के द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है. यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट द्वारा याचिका संख्या W.P.(S) No. 5570/2023 (किरण कुमारी हेम्ब्रम एवं अन्य बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य) में पारित आदेश के अनुपालन के तहत लिया गया है.
क्या था मामला और कोर्ट का निर्देश
किरण कुमारी हेम्ब्रम एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने 24 जून को न्यायादेश पारित किया था. अदालत ने पाया था कि अन्य विभागों के कर्मियों की तरह प्राथमिक शिक्षकों को भी एमएसीपी का लाभ देने से जुड़े मामले पर विचार किया जा रहा है. इसके तहत अदालत ने संबंधित प्रतिवादियों (सरकार) को 16 सप्ताह के भीतर प्राथमिक शिक्षकों को एमएसीपी लाभ देने के मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट के इसी आदेश के आलोक में निदेशक, प्राथमिक शिक्षा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति (वित्त विभाग तथा विधि विभाग के प्रतिनिधियों सहित) का गठन किया गया, जिसकी बैठक 24 जून को संपन्न हुई.
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एमएसीपी न देने के पीछे क्या हैं विभागीय तर्क?
– समिति और स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा सभी दस्तावेजों, प्रोन्नति नियमों और वित्त विभाग के संकल्पों की समीक्षा के बाद यह फैसला सुनाया गया. मुख्य रूप से कुछ तथ्य सामने आए.
– विशेष प्रोन्नति नियमावली की मौजूदगी: प्रारंभिक शिक्षकों के लिएझारखंड राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 1993 लागू थी, जिसके स्थान पर वर्तमान में विभागीय अधिसूचना संख्या 909 (दिनांक 01.07.2025) द्वारा झारखंड राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 2025 गठित की गई है. इसके तहत शिक्षकों को समय-समय पर वित्तीय उन्नयन और प्रोन्नति का लाभ दिया जाता है.
– वित्त विभाग का नियम (संकल्प संख्या 2981): वित्त विभाग के संकल्प संख्या 2981 के परिशिष्ट-1 की कंडिका-16 के अनुसार, राजकीयकृत और अल्पसंख्यक विद्यालयों के शिक्षकों तथा ऐसे कर्मियों के लिए जिनके लिए अलग से विशेष प्रोन्नति योजना बनी हुई है, उन पर एमएसीपी योजना लागू नहीं होती है. क्योंकि शिक्षकों के लिए पहले से प्रोन्नति व उच्चतर वेतनमान की व्यवस्था लागू है, इसलिए वे एमएसीपी और एसीपी के हकदार नहीं हैं.
प्रोन्नति एवं वित्तीय उन्नयन के लिए सेवा अवधि (शर्तें)
– नियमों के तहत प्रोन्नति पाने के लिए निर्धारित न्यूनतम अटूट सेवा अवधि के आंकड़े इस प्रकार हैं.
– ग्रेड-2 में प्रोन्नति: ग्रेड-1 में न्यूनतम 12 वर्ष की सेवा
– ग्रेड-3 में प्रोन्नति: स्नातक प्रशिक्षित तथा ग्रेड-2 में न्यूनतम 12 वर्ष या इंटर प्रशिक्षित तथा ग्रेड-2 में न्यूनतम 18 वर्ष की सेवा
– ग्रेड-4 में प्रोन्नति: पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध न होने पर ग्रेड-1 से ग्रेड-4 के लिए न्यूनतम आठ वर्ष की अटूट सेवा एवं 16 दिसंबर 2014 के उपरांत नियुक्त शिक्षकों के लिए उच्च प्राथमिक टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य.
– ग्रेड-5 में प्रोन्नति: ग्रेड-4 में न्यूनतम 12 वर्ष की सेवा
– ग्रेड-6 में प्रोन्नति: स्नातकोत्तर प्रशिक्षित तथा ग्रेड-5 में न्यूनतम 12 वर्ष या स्नातक प्रशिक्षित तथा ग्रेड-5 में न्यूनतम 18 वर्ष की सेवा.
– ग्रेड-7 (प्रधानाध्यापक) में प्रोन्नति: स्नातकोत्तर प्रशिक्षित वेतनमान (ग्रेड-4) में न्यूनतम पांच वर्ष की अटूट सेवा (सीधी भर्ती या प्रोन्नति के पदों के 50-50% अनुपात के आधार पर).
– ग्रेड-8 में प्रोन्नति: ग्रेड-7 में न्यूनतम 12 वर्ष की सेवा
– उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसाओं के बाद, सरकार के सचिव उमा शंकर सिंह ने औपचारिक रूप से निर्णय जारी किया है कि विभागीय प्रोन्नति नियमावली के माध्यम से कालावधि पूरी करने पर शिक्षकों को पहले से ही उच्चतर वेतनमान दिए जाने का प्रावधान है. इस कारण से राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों को एसीपी या एमएसीपी योजना का अतिरिक्त लाभ देय नहीं होगा.
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