Ranchi: पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध मॉड्यूल का बड़ा पर्दाफाश किया है. इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी हमीम मंडल को वर्धमान से और उसकी कथित सहयोगी व गर्लफ्रेंड अर्पिता सरकार साहेबगंज को गिरफ्तार किया है. एसटीएफ के आईजी गौरव शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इस नेटवर्क के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं.

जंतर-मंतर पर पुलिस की वर्दी पहनकर हिंसा की थी योजना
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी हमीम मंडल दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ फैलाने की बड़ी साजिश रच रहा था.साजिश के तहत आतंकवादियों की योजना पुलिस की वर्दी पहनकर प्रदर्शन के बीच घुसपैठ करने की थी. पूछताछ में हमीम ने खुलासा किया कि पाकिस्तान स्थित हम्माद (शाहजाद भट्टी गिरोह का सहयोगी) ने उसे 10-12 दिन पहले पुलिस की वर्दियां खरीदने के निर्देश दिए थे. इन वर्दियों को दिल्ली के एक तय बस स्टॉप पर डिलीवर किया जाना था, ताकि आत्मघाती हमलावर इनका इस्तेमाल कर सकें,हालांकि, पेमेंट से जुड़ी गोपनीयता संबंधी समस्याओं के कारण वर्दियों की यह डिलीवरी पूरी नहीं हो सकी.

पेट्रोल बम और युवाओं के ब्रेनवॉश की कोशिश
जांच में यह बात भी सामने आई है कि हमीम मंडल दिल्ली में ऐसे लोगों की तलाश कर रहा था जो प्रदर्शन के दौरान पेट्रोल बम फेंक सकें. इसके अलावा, आरोपी सोशल मीडिया (व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स) के माध्यम से युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ने और कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा था.
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साहिबगंज से अर्पिता सरकार की गिरफ्तारी
मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने तकनीकी सर्विलांस (डिजिटल ट्रैकिंग) की मदद से हमीम की सहयोगी अर्पिता सरकार की लोकेशन ट्रेस की. इसके बाद उसे झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार कर लिया गया. अर्पिता को आगे की पूछताछ के लिए पश्चिम बंगाल लाया गया है.
स्थानीय मंत्री उमेश राय के बेटे को हनीट्रैप में फंसाने की साजिश
आईजी गौरव शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान एक और सनसनीखेज बात सामने आई है. स्थानीय मंत्री उमेश राय भी इस नेटवर्क के निशाने पर थे. हमीम और अर्पिता ने मिलकर मंत्री के बेटे को हनी ट्रैप में फंसाने की योजना बनाई थी.

सीमा पार से ड्रग्स, हथियार और टेरर फंडिंग
एसटीएफ के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चलता है कि हमीम मंडल एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा था जो सीमा पार से: नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी, गैर-कानूनी हथियारों की सप्लाई और भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग (टेरर फंडिंग) जैसे अपराधों में लिप्त था.
