Ranchi : झारखंड में आतंक और रंगदारी का सिंडिकेट चलाने वाले दो खूंखार गैंगस्टरों अमन साहू और सुजीत सिन्हा का पुलिस मुठभेड़ में खात्मा हो चुका है. कोयलांचल और राजधानी रांची समेत राज्यभर के कारोबारियों, ठेकेदारों और कोयला व्यवसायियों के लिए दहशत का दूसरा नाम बने इन दोनों अपराधियों के अंत के साथ ही झारखंड पुलिस की ‘ऑपरेशन क्लीन’ मुहिम को बड़ी सफलता मिली है.

गैंगस्टर अमन साहू : रांची से छत्तीसगढ़ तक फैला था खौफ का नेटवर्क
– रांची जिले के बुढ़मू का रहने वाला अमन साहू ने शुरुआती दिनों में छोटे-मोटे अपराध और नक्सली संगठनों से सांठ-गांठ के बाद आपराधिक गिरोह सुजीत सिन्हा गैंग से हाथ मिलाया. इसके बाद वो रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, रांची और कोयलांचल क्षेत्रों में कोयला खनन कंपनियों, लेवी और ठेकेदारों को निशाना बनाकर उसने करोड़ों की रंगदारी का अवैध नेटवर्क खड़ा किया.
– अमन साहू गिरोह ने हजारीबाग और रामगढ़ इलाके में पुलिस तथा एटीएस ATS की टीमों पर कई बार सीधी फायरिंग की. जिसमें कई पुलिस अधिकारी घायल हुए थे.
– कोयला कारोबारियों और निर्माण कंपनियों के साइट पर अंधाधुंध गोलीबारी और आगजनी करवाकर दहशत फैलाना इस गिरोह की मुख्य रणनीति थी.
– जेल में रहने के दौरान भी उसने सोशल मीडिया, विदेशी वर्चुअल नंबरों और अत्याधुनिक हथियारों (जैसे AK-47) के बल पर अपना नेटवर्क चलाया. छत्तीसगढ़ के कोयला कारोबारियों से भी लेवी वसूलने के मामले में उस पर कई प्राथमिकियां दर्ज थीं.
– अमन साहू को छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ के लिए गई थी. रिमांड अभी खत्म होने के बाद 11 मार्च 2025 को अमन साहू को एटीएस ATS की सुरक्षा में रांची लाया जा रहा था. इसी दौरान पलामू में अमन साहू के गुर्गों ने पुलिस पर हमला कर अमन साहू को छुड़ाने की कोशिश की. जिसमें वह पुलिस की गोली का शिकार होकर मारा गया.
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा : अपराध का पुराना खिलाड़ी और साहू का मुख्य सहयोगी
– सुजीत सिन्हा पलामू और कोयलांचल क्षेत्र का एक चर्चित नाम था. उस पर हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और लेवी वसूली के 75 से अधिक मामले दर्ज थे.
– सुजीत सिन्हा ने पलामू, गढ़वा, लातेहार से लेकर रांची और धनबाद तक अपने गिरोह के तार फैला रखा था. बाद में उसने अमन साहू के साथ हाथ मिलाकर सुजीत-अमन गिरोह का गठन किया. जो राज्य का सबसे घातक रंगदारी सिंडिकेट बन गया.
– ठेकेदारों, कोयला ट्रांसपोर्टरों और पेट्रोल पंप मालिकों को धमकी देकर मोटी रकम वसूलना और मना करने पर हत्याएं करवाना इस गैंग की पहचान थी.
– सुजीत सिन्हा लंबे समय तक राज्य की विभिन्न जेलों (रांची, साहिबगंज आदि) में बंद रहा, लेकिन वहां से भी मोबाइल के जरिए शूटरों को निर्देश देकर वारदातों को अंजाम देता रहा.
सुजीत-अमन सिंडिकेट का पतन : एक ही तरीके से हुआ दोनों का अंत
सुजीत-अमन गैंग की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए झारखंड पुलिस और एटीएस ATS ने लगातार शिकंजा कसा. हिरासत से भगाने के दौरान अमन साहू को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था. इसी तरह अमन साहू के खात्मे के बाद सुजीत सिन्हा भी पुलिस के हिरासत से भगाने का प्रयास किया इसी दौरान मुठभेड़ के दौरान उसे ढेर कर दिया गया.

