रांची: पारित झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इस विधेयक में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि किसी भी नागरिक के साथ लिंग, नस्ल, पंथ, वर्ग, जाति, जन्म स्थान, धार्मिक विश्वास, व्यवसाय या राजनीतिक विचार के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा. विश्वविद्यालयों में पद, सदस्यता, नियुक्ति, डिग्री, डिप्लोमा या किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश के अवसर सभी के लिए समान होंगे.

महिलाओं और आरक्षण पर फोकस
विधेयक में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं, जिसके तहत विश्वविद्यालय केवल महिलाओं के लिए कॉलेज या संस्थान स्थापित, मान्यता या आरक्षित कर सकता है. इसके साथ ही शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की नियुक्ति एवं नामांकन में राज्य सरकार की आरक्षण नीति को लागू करना अनिवार्य होगा, जिससे सामाजिक न्याय को और मजबूती मिलेगी.
राज्य सरकार की बढ़ी भूमिका
इस विधेयक के तहत राज्य सरकार को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं. स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों को छोड़कर नए पदों का सृजन, कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों की स्वीकृति एवं पुनरीक्षण का अधिकार सरकार के पास होगा. इसके अलावा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त निधियों के उपयोग और विश्वविद्यालय की अचल संपत्ति के विक्रय या पट्टे से संबंधित निर्णय भी राज्य सरकार की मंजूरी से होंगे.

