Gumla: भरनो प्रखंड मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित सुदूरवर्ती क्षेत्र सलकेया गांव के नव उत्क्रमित मध्य विद्यालय सलकेया की बदहाल स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है. विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और बरसात के दिनों में छत से लगातार पानी टपकने के कारण छात्र-छात्राओं को भय और असुविधा के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है. भवन की हालत ऐसी है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, बावजूद इसके बच्चे इसी भवन में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं.

विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक की होती है पढ़ाई
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजीव कुमार ने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है और कुल 85 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. विद्यालय में तीन शिक्षक कार्यरत हैं. विद्यालय परिसर में कुल 7 कमरे बने हुए हैं, लेकिन इनमें से 6 कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिसके कारण उनका उपयोग नहीं किया जा सकता. मजबूरी में सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है. उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में विद्यालय की छत से लगातार पानी टपकता रहता है. बच्चे भीगते हुए पढ़ाई करने को मजबूर हैं. भवन की छत का प्लास्टर लगातार झड़ रहा है और कई जगहों पर लोहे की सरिया (छड़) बाहर निकल आई है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. शिक्षक और बच्चे हर समय दुर्घटना की आशंका के बीच विद्यालय में समय बिताते हैं.
लिखित आवेदन देने के बाद भी नहीं की गई कोई पहल
प्रभारी एचएम संजीव कुमार ने बताया कि विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति से विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है. यहां तक कि बीआरसी कार्यालय भरनो में भी लिखित आवेदन देकर भवन की मरम्मत और नए भवन के निर्माण की मांग की गई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है. विद्यालय के अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन जर्जर भवन के कारण हमेशा किसी अनहोनी का डर बना रहता है. उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया, तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी. ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है, कि विद्यालय भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराकर जर्जर कमरों की मरम्मत कराई जाए. साथ ही बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द नए विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि नौनिहालों को भयमुक्त वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.

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