Hazaribagh: तेजी से बदलती दुनिया में जहां निस्वार्थ सेवा के उदाहरण कम होते जा रहे हैं, वहीं बड़कागांव प्रखंड की ढेंगा ग्राम पंचायत अंतर्गत कदमाडीह गांव के समाजसेवी जनार्दन सिंह पिछले 10 वर्षों से भक्ति, सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं. उनके लिए भगवान की पूजा केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम है.

हर दिन सुबह करीब 4 बजे, जब अधिकांश लोग नींद में होते हैं, तब जनार्दन सिंह अपने फूलों के बगीचे में पहुंच जाते हैं. ताजे और सुगंधित फूल चुनने के बाद वे क्षेत्र के करीब 31 मंदिरों तक पहुंचाकर भगवान को अर्पित करते हैं. यह सिलसिला पिछले एक दशक से बिना किसी नागा के लगातार जारी है.
निस्वार्थ सेवा, बिना किसी अपेक्षा के
जनार्दन सिंह इस सेवा के बदले कभी कोई शुल्क या सम्मान की अपेक्षा नहीं रखते. यदि किसी परिवार के घर पूजा के लिए फूल उपलब्ध नहीं होते, तो वे स्वयं उनके घर जाकर निशुल्क फूल उपलब्ध कराते हैं. उनका मानना है कि किसी भी श्रद्धालु की पूजा फूलों के अभाव में बाधित नहीं होनी चाहिए. भगवान की सेवा निरंतर जारी रहे, इसके लिए उन्होंने अपने घर में ही विभिन्न प्रकार के फूलों का सुंदर बगीचा तैयार किया है. प्रतिदिन इसी बगीचे से फूल तोड़कर मंदिरों और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाए जाते हैं. उनके इस प्रयास से मंदिरों के साथ-साथ लोगों के मन भी श्रद्धा और सेवा के भाव से महक उठते हैं.
‘भगवान की सेवा ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सुख’
जनार्दन सिंह कहते हैं, “मैं प्रतिदिन करीब 30 से 31 मंदिरों में फूल दान करता हूं. इससे मुझे आत्मिक शांति और अपार संतोष मिलता है. भगवान की सेवा ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सुख है. जब किसी श्रद्धालु की पूजा मेरे दिए फूलों से होती है, तो मुझे लगता है कि मेरा जीवन सार्थक हो गया.”
ग्रामीणों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
ग्रामीणों का कहना है कि जनार्दन सिंह की यह निस्वार्थ सेवा पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी है. बिना किसी प्रचार या सम्मान की इच्छा के वे वर्षों से श्रद्धा के फूल बांट रहे हैं. उनकी यह पहल संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरों की आस्था को मजबूत करने और समाज में सेवा की भावना जगाने का माध्यम भी है.

