Ranchi: दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर झारखंड यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक, राजनीतिक और झारखंड आंदोलन में निभाई गई भूमिका को याद किया. कार्यक्रम के दौरान जुटान के अध्यक्ष प्रो. जगदीश लोहरा ने शिबू सोरेन के जीवन और उनके संघर्षों पर गंभीर अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने घोषणा की कि अगले छह महीने के भीतर शोधार्थियों के सहयोग से ‘झारखंड आंदोलनकारियों की नजर में गुरुजी’ शीर्षक से एक पुस्तक तैयार की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के आंदोलनकारियों के अनुभवों और दृष्टिकोण को भी शामिल किया जाएगा, ताकि शिबू सोरेन के व्यक्तित्व और झारखंड आंदोलन में उनकी भूमिका को व्यापक रूप से दस्तावेजित किया जा सके.

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‘झारखंड के इतिहास को नए दृष्टिकोण से लिखने की जरूरत’
महासचिव डॉ. विनय भारत ने कहा कि झारखंड के इतिहास को नए दृष्टिकोण से लिखने की जरूरत है. उनका कहना था कि राज्य के शहीदों, आंदोलनकारियों और महापुरुषों के योगदान को सही तरीके से दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और विरासत को बेहतर ढंग से जान सकें. सभा में डॉ. यू.एन. तिवारी, डॉ. किशोर सुरीन और डॉ. वीरेंद्र सोय समेत कई शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे और शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया.


