Opposition protest march in Parliament premises: बुधवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे. विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का विरोध किया. इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोप और अन्य मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की. विपक्ष का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस का रवैया उचित नहीं था और अयोध्या राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. वहीं, इस पूरे विरोध प्रदर्शन के बीच संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही. विपक्षी दल इन मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाने की बात कह रहे हैं.
बच्चों पर हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी लेनी होगी : प्रियंका गांधी
इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘जो लोग सरकारी पदों पर हैं, उनकी जनता के प्रति कुछ जिम्मेदारियां होती हैं. यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं; यह किसी का शाही दरबार नहीं है. इसलिए, अगर ऐसी घटनाएं हुई हैं, बच्चों पर गोलियां चलाई गई हैं, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, आंसू गैस छोड़ी गई है या लाठीचार्ज का आदेश दिया गया है, तो किसी न किसी को तो जिम्मेदार ठहराया ही जाना चाहिए. किसी ने तो वे आदेश दिए होंगे, और उन्हें ही जिम्मेदारी लेनी चाहिए’.


जवाबदेही तय होनी चाहिए: मोहम्मद जावेद
वहीं, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, ‘संदेश साफ है: जैसे हमारे बच्चों ने गांधी जी के सिद्धांतों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया, वैसे ही हम भी यहीं से अपना विरोध शुरू करेंगे. हमारी मांग स्पष्ट है: हमारे बच्चों पर की गई अन्यायपूर्ण हिंसा, पैलेट गन चलाने, चोट लगने और सिर व अंगों पर वार से हड्डियां टूटने जैसी घटनाओं के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए. इन कामों के लिए किसी न किसी को जिम्मेदारी लेनी ही होगी’. कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, ‘गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर जंतर-मंतर पर छात्रों पर बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने के बारे में बयान देना चाहिए. उन्हें ‘चंदा चोरी’ यानी भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर भी बयान देना चाहिए. साथ ही, उन्हें जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर भी बयान देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर की जनता से वादा किया था कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा’.

सदन में आएं पीएम, देश से जुड़े मुद्दों पर करें बात : गौरव गोगोई
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘विपक्ष मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और देश से जुड़े मुद्दों पर बात करें. यह अफसोस की बात है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही सदन से नदारद हैं और अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी जवाबदेही भी नहीं दिख रही है’. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, ‘हमारी बस यही मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और 20 जुलाई को जो हुआ, उसके बारे में बयान दें कि छात्रों के साथ क्या हुआ, यह कैसे हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और आदेश किसने दिए थे. हमारी यही मांग है’.
अमित शाह सदन में क्यों नहीं आ रहे? किस बात का है डर? : संजय राउत
शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने कहा, ‘गृह मंत्री सार्वजनिक जगहों और कभी-कभी संसद परिसर में तो दिखते हैं; लेकिन वे सदन में नहीं आते. लोकसभा और राज्यसभा उन्हें ढूंढ रही हैं. हमने ‘गुमशुदा’ के पोस्टर तैयार किए हैं और इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराएंगे. उन्हें सदन में आना चाहिए. उन्हें किस बात का डर है? 12 साल से आपने देश को डर के साये में रखा है. आपके अंडर ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, आईटी सेल और साइबर फोर्स जैसी एजेंसियां काम कर रही हैं, फिर भी आप डरे हुए हैं’.

