Ranchi: झारखंड की सियासत एक बार फिर उबाल पर है. मानसून की बेरुखी से तपते खेतों और रोजगार की आस में सड़कों पर उतरे युवाओं के आक्रोश के बीच, झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 6 अगस्त से प्रारंभ होने जा रहा है. मात्र पांच कार्य दिवसों वाले इस छोटे लेकिन बेहद अहम सत्र के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं. सत्ता के गलियारों से लेकर विपक्ष के तेवरों तक, हर ओर एक ही सुगबुगाहट है. सत्र के सुचारू संचालन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. स्पीकर कक्ष में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, माले विधायक अरुप चटर्जी, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान, राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान और जेएलकेएम के नवनिर्वाचित विधायक जयराम महतो समेत तमाम प्रमुख चेहरे मौजूद थे. बैठक के दौरान स्पीकर ने सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की, लेकिन विपक्षी नेताओं और युवा विधायकों ने दो टूक शब्दों में जता दिया कि जनता और छात्रों के ज्वलंत मुद्दों पर सदन के भीतर और बाहर कड़ा रुख अपनाया जाएगा.
मुख्य मुद्दे जो सदन की हवा करेंगे गर्म
जेपीएससी और जेएसएससी विवाद: झारखंड के युवाओं का गुस्सा अब थमने का नाम नहीं ले रहा है. जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों, धांधलियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र सड़कों पर आंदोलनरत हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा पूरी तरह से छात्रों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है. पार्टी विधायक दल की बैठक में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पुख्ता रणनीति बनाई जाएगी. विधायक जयराम महतो ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए मांग की है कि सरकार का एक शिष्टमंडल तुरंत छात्रों के धरना स्थल पर जाए. उन्होंने 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा और जेएसएससी की अन्य विवादित परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द करने की मांग करते हुए सरकार को सीधी चुनौती दी है. सुखाड़ की मार और कृषि संकट: मानसून की बेरुखी और बारिश के अभाव में झारखंड के कई जिलों में सुखाड़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. धान के खेत सूख रहे हैं और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं. सर्वदलीय बैठक में कृषि की बदहाल स्थिति और सुखाड़ पर विशेष चर्चा कराने की पुरजोर मांग उठी है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार कागजी दावों में मस्त है, जबकि अन्नदाता पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है.

सरकार का रक्षात्मक रुख
संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्वीकार किया कि बैठक में छात्रों के आंदोलन और सुखाड़ की स्थिति पर चर्चा हुई है. उन्होंने कहा कि इस पर कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा. हालांकि, छात्रों के धरना स्थल पर सरकार का कोई शिष्टमंडल भेजने के सवाल पर उन्होंने फिलहाल किसी आधिकारिक निर्णय से इनकार किया. जब मीडिया ने खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने सधे हुए अंदाज में कहा कि सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं, कोई भी आकर बात कर सकता है. सीएम ने यह भी जोड़ा कि मानसून सत्र को लेकर सत्ता पक्ष पूरी तरह से तैयार है और हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा.

7 अगस्त को पहला अनुपूरक बजट
इस पांच दिवसीय मानसून सत्र का सबसे बड़ा वित्तीय पड़ाव 7 अगस्त को आएगा, जब चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखा जाएगा.
पहले दिन (6 अगस्त) शोक प्रकाश और सामान्य कामकाज के साथ सत्र की शुरुआत होगी.
7 अगस्त को पहली पाली में प्रश्नकाल के बाद सरकार अपना पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी.
8 और 9 अगस्त को शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश रहेगा, जिससे विपक्षी दलों को रणनीति और तेज करने का पूरा समय मिलेगा.
10 अगस्त को प्रश्नकाल के बाद दूसरी पाली में अनुपूरक बजट पर व्यापक वाद-विवाद होगा और संबंधित विनियोग विधेयक को सदन से पारित कराया जाएगा.
11 और 12 अगस्त को दोनों पालियों में राजकीय विधेयक और गैर सरकारी संकल्प सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे, जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगने की संभावना है.
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