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JPSC-JSSC आंदोलन में पोस्टरों से संदेश: ‘देश विरोधी नारे और गाली-गलौज की इजाजत नहीं’, अभिजीत दीपके को भी दिल्ली में हुए नारेबाज़ी पर जवाबदेही तय करने को कहा

Ranchi: JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में अब पोस्टरों के जरिए भी कई सवाल और संदेश...

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JPSC-JSSC आंदोलन में पोस्टरों से संदेश

Ranchi: JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में अब पोस्टरों के जरिए भी कई सवाल और संदेश सामने रखे जा रहे हैं. आंदोलन स्थल पर लगाए गए पोस्टरों में परीक्षा की पारदर्शिता, जिम्मेदारी तय करने और आंदोलन की मर्यादा बनाए रखने की बात प्रमुखता से उठाई गई है. छात्रों की ओर से लगाए गए पोस्टरों में दिल्ली में हुए कथित विवाद, हिंसा और गाली-गलौज को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं. पोस्टर के जरिए अभिजीत दीपके की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाया गया है. छात्रों का कहना है कि किसी भी विवाद या घटना में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जनता को इसका जवाब मिलना चाहिए.

‘आंदोलन में देश विरोधी नारे या गाली-गलौज नहीं चलने देंगे’

आंदोलन स्थल पर लगे पोस्टरों और छात्रों के संदेश से यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखने के लिए है. छात्रों का कहना है कि आंदोलन के मंच या प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति को देश विरोधी नारे लगाने, गाली-गलौज करने या हिंसा फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. छात्रों ने यह संदेश भी दिया है कि उनके आंदोलन को किसी तरह की आपत्तिजनक गतिविधि से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनका फोकस JPSC-JSSC परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर है.

मीडिया कवरेज को लेकर भी छात्रों ने रखी अपनी बात

छात्रों ने मीडिया से भी अपील की है कि आंदोलन की कवरेज करते समय आंदोलनकारी छात्रों का पक्ष प्राथमिकता से लिया जाए. उनका कहना है कि आंदोलन स्थल पर आने वाले मीडिया प्रतिनिधि किसी भी बाहरी व्यक्ति के बयान को छात्रों के आंदोलन की आधिकारिक राय मानकर प्रसारित न करें. छात्रों की मांग है कि उनसे सीधे बातचीत कर उनकी मांगों, समस्याओं और आंदोलन के उद्देश्य को सामने रखा जाए. उनका कहना है कि किसी दूसरे व्यक्ति के बयान को छात्रों के आंदोलन से जोड़ने पर आंदोलन की वास्तविक मांगों और संदेश को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है.

पोस्टरों में विरोध के साथ झारखंडी संस्कार का भी संदेश

आंदोलन स्थल पर लगे दूसरे पोस्टरों में झारखंड की संस्कृति और शांतिपूर्ण विरोध की परंपरा को भी सामने रखा गया है. इनमें कहा गया है कि विरोध हो, लेकिन हिंसा नहीं; आवाज उठे, लेकिन अपमान नहीं. पत्थरबाजी, गाली-गलौज और किसी समुदाय के अपमान से दूर रहने का संदेश भी पोस्टरों में दिया गया है.

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