Ranchi: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं (जेपीएससी और जेएसएससी) को लेकर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच चल रहा गतिरोध थमता नजर नहीं आ रहा है. शनिवार को सरकारी प्रतिनिधियों और छात्र आंदोलनकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई. परीक्षाओं को रद्द करने और नियमों में बदलाव की शॉर्ट-टर्म तथा लॉन्ग-टर्म मांगों के बीच पेंच फंसने के कारण बातचीत किसी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. इस विफलता से आक्रोशित छात्रों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए विधानसभा घेराव की घोषणा की है.


परीक्षाएं रद्द करने और नियमावली में सुधार की मांग
वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने दो श्रेणियों में अपनी मांगें रखीं. अल्पकालिक मांगों के तहत छात्रों ने जेपीएससी (JPSC), एपीपी (APP), जेपीएससी बैकलॉग 2023 और 2025, जेटेट 2026 (JTET), एसीएफ (ACF) और एफआरओ (FRO) जैसी प्रमुख परीक्षाओं को तुरंत रद्द करने की मांग की. छात्रों का आरोप है कि इन परीक्षाओं की प्रक्रियाओं में गंभीर विसंगतियां हैं. ये सभी एग्जाम एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी ने लिए हैं, जो काफी विवादों में रही है. वहीं, दीर्घकालिक मांग के रूप में छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी (JSSC) की पूरी परीक्षा नियमावली को पारदर्शी, स्पष्ट और सुदृढ़ बनाने की मांग की, ताकि भविष्य में होने वाली नियुक्तियां विवादों से मुक्त रह सकें.

आंदोलन पर राजनीतिक साये का आरोप
बातचीत के बेनतीजा रहने के साथ ही इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. सरकारी पक्ष की ओर से वार्ता में शामिल छात्र प्रतिनिधियों पर किसी खास राजनीतिक दल के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया गया है. इस छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीतिक दल अपना एजेंडा चमका रहे हैं और जानबूझकर वार्ता को सफल नहीं होने दिया जा रहा है.

छात्रों में भारी आक्रोश, बढ़ेगी सुरक्षा
खुद पर राजनीतिक दलों से जुड़े होने का आरोप लगने और वार्ता टूटने से छात्र संगठन बेहद गुस्से में हैं. आंदोलनकारियों ने सरकार के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य की लड़ाई है. अपनी मांगों के समर्थन में छात्रों ने अब सीधे तौर पर विधानसभा का घेराव करने का फैसला किया है. वहीं, विधानसभा के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की तैयारी की जा रही है.

