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मानसून के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा, हजारीबाग में 100 से अधिक लोग बने शिकार, बड़कागांव-केरेडारी क्षेत्र में बढ़े मामले

Hazaribagh: मानसून के दस्तक देते ही हजारीबाग जिले में सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. बारिश के दौरान सांपों...

सर्पदंश

Hazaribagh: मानसून के दस्तक देते ही हजारीबाग जिले में सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. बारिश के दौरान सांपों के बिलों में पानी भरने और सुरक्षित स्थान की तलाश में उनके आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने के कारण ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जिले में अब तक 100 से अधिक लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं, जबकि इनमें 5 से 6 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है. स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लगातार लोगों से सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील कर रहे हैं.

बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र में ज्यादा घटनाएं

बारिश के मौसम में बड़कागांव और केरेडारी प्रखंड क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं में विशेष रूप से वृद्धि देखी जा रही है. इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं. खेतों, खलिहानों, जंगलों और कच्चे मकानों के आसपास सांपों का खतरा अधिक रहता है. बारिश के बाद सांपों के अपने ठिकानों से निकलकर सुरक्षित एवं सूखे स्थानों की ओर जाने के कारण लोगों और सांपों का आमना-सामना बढ़ जाता है. ग्रामीण इलाकों में कई बार लोग सर्पदंश के बाद अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं. इससे इलाज में देरी होती है और गंभीर स्थिति में मरीज की जान बचाना मुश्किल हो सकता है.

‘झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें’

शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी तरह का समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. उन्होंने लोगों से झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पताल पहुंचने की अपील की. उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बाद समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है. जिले में शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है. चिकित्सकों का कहना है कि मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सा सुविधा मिलेगी, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.

सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी घोषित किया गया

सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए झारखंड सरकार ने मार्च 2026 से सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी की श्रेणी में शामिल किया है. इसके तहत सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए सर्पदंश के प्रत्येक मामले की रिपोर्ट करना अनिवार्य किया गया है. इससे जिले और राज्य में सर्पदंश के मामलों का वास्तविक आंकड़ा जुटाने तथा इसके आधार पर रोकथाम और उपचार की बेहतर व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हजारीबाग में सर्पदंश की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. रिपोर्ट में 2025 में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 327 सर्पदंश के मामले दर्ज किए जाने का भी उल्लेख है. वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से जून तक 43 मामले सामने आने की जानकारी दी गई है. मानसून शुरू होने के बाद मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है.

खेतों और घरों में बरतें विशेष सावधानी

विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान सांप खेतों, झाड़ियों, लकड़ी के ढेर, कच्चे मकानों और घरों के आसपास मौजूद सूखे स्थानों में छिप सकते हैं. इसलिए रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना, जमीन पर सोने से बचना तथा जूते-चप्पल पहनने से पहले उनकी जांच करना जरूरी है. ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. घरों के आसपास झाड़ियों और कचरे को साफ रखने तथा लकड़ी या अन्य सामान को व्यवस्थित तरीके से रखने से भी सांपों के छिपने की संभावना कम की जा सकती है.

सर्पदंश के बाद क्या करें

सर्पदंश होने पर मरीज को शांत रखें और प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें. घाव को काटने, चूसने, कसकर बांधने या किसी तरह का घरेलू रसायन लगाने से बचें. मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना चाहिए. सांप को पकड़ने या मारने के प्रयास में समय गंवाना भी खतरनाक हो सकता है. मानसून में बढ़ती सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि अंधविश्वास और झाड़-फूंक के कारण होने वाली देरी को रोका जा सके और समय पर इलाज मिलने से लोगों की जान बचाई जा सके.

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