Click Here
Click Here
Click Here
Click Here
Click Here

संघर्ष से सफलता की नई इबारत: राहिल हेम्ब्रम ने हौसले से बदली अपनी तकदीर

Chaibasa: जिले के बंदगांव प्रखंड अंतर्गत बंदगांव पंचायत के मातलोयोंग गांव की रहने वाली राहिल हेम्ब्रम की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता...

Chaibasa: जिले के बंदगांव प्रखंड अंतर्गत बंदगांव पंचायत के मातलोयोंग गांव की रहने वाली राहिल हेम्ब्रम की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल है. राहिल की जीवन यात्रा केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों के बीच अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लगातार संघर्ष करने वाली एक महिला की कहानी है.

पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी

राहिल का जीवन पति और दो बच्चों के साथ सामान्य रूप से चल रहा था. लेकिन अचानक पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. दो छोटे बच्चों के पालन-पोषण और उनके भविष्य की चिंता के बावजूद राहिल ने हिम्मत नहीं हारी और परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया.

मनरेगा में मेट के रूप में शुरू किया काम

ग्राम सभा, लीड्स तथा प्रखंड प्रशासन के सहयोग से रोजगार गारंटी योजनाओं, विशेषकर मनरेगा के तहत राहिल ने मेट के रूप में काम करना शुरू किया. मजदूरों के कार्य की निगरानी और उन्हें संभालने की जिम्मेदारी उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ निभाई. कड़ी धूप, बारिश और विपरीत परिस्थितियों के बीच काम करते हुए उन्होंने न केवल परिवार को आर्थिक सहारा दिया, बल्कि अपने भीतर नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास भी विकसित किया.

होमगार्ड बनने का देखा सपना

राहिल के मन में आगे बढ़ने और कुछ बड़ा करने की चाह लगातार बनी रही. उन्होंने होमगार्ड बनकर समाज और देश की सेवा करने का सपना देखा. दो बच्चों की जिम्मेदारी, दिनभर मेट का काम और उसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा तथा लिखित परीक्षा की तैयारी उनके लिए आसान नहीं थी. इसके बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी. जब अधिकांश लोग आराम कर रहे होते, तब राहिल अपने सपने को पूरा करने के लिए तैयारी में जुटी रहती थीं.

मेहनत रंग लाई, होमगार्ड में हुआ चयन

आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. वर्ष 2026 में राहिल हेम्ब्रम ने होमगार्ड की लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता जांच सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और उनका चयन होमगार्ड के पद पर हुआ. चयन के बाद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी नौकरी ज्वाइन की.

Also Read: JPSC-JSSC पेपर लीक के विरोध में छात्रों का हंगामा, CM आवास घेराव के दौरान पुलिस से झड़प

BDO ने किया सम्मानित

राहिल की सफलता की जानकारी मिलने के बाद बीडीओ भीषम कुमार ने उन्हें सम्मानित कर उनके संघर्ष और उपलब्धि की सराहना की. उन्होंने राहिल के हौसले को अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बताया.

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

आज राहिल हेम्ब्रम अपने गांव ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनके संघर्ष ने यह साबित किया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर मंजिल हासिल की जा सकती है. राहिल की वर्दी अब केवल उनकी नौकरी की पहचान नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, आत्मनिर्भरता और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए किए गए अथक प्रयासों की पहचान बन चुकी है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *